कोरबा (पब्लिक फोरम)। अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा की ओर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। कार्यक्रमों का उद्देश्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग, अवैध तस्करी और उसके सामाजिक दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करना था। इस दौरान नालसा की डॉन (DAWN) योजना 2025 के तहत नशा मुक्त समाज के निर्माण का संदेश भी दिया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशन तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के तत्वावधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न स्थानों पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अभियान में तालुका विधिक सेवा समिति करतला के अध्यक्ष एवं तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कटघोरा हेमंत रात्रे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ग्रेसी सिंह, व्यवहार न्यायाधीश तृप्ति राघव सहित पैनल अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, पैरालीगल वालंटियर और अन्य विधिक अधिकारियों ने भाग लिया।
जेलों, बाल गृहों और ग्राम पंचायतों तक पहुंचा अभियान
कार्यक्रम जिला जेल कोरबा, उप जेल कटघोरा, बाल संप्रेषण गृह, बालिका गृह, बाल गृह दर्री तथा बड़मार, मशान, सकडुकला, पुटा और गंगदेई ग्राम पंचायतों सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किए गए। कटघोरा, करतला और पाली क्षेत्र के लोगों को अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के उद्देश्य और नशा मुक्ति के महत्व की जानकारी दी गई।
नालसा की डॉन योजना 2025 पर दिया गया विशेष जोर
अभियान के दौरान नालसा की DAWN (Drug Awareness and Wellness Navigation for a Drug Free India) Scheme-2025 के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि योजना का उद्देश्य लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खतरों के प्रति जागरूक करना है।
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर डालता है। इसलिए नशा मुक्त समाज का निर्माण सामूहिक भागीदारी और जनजागरूकता से ही संभव है।
बंदियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया संदेश
कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में जिला जेल कोरबा और उप जेल कटघोरा के बंदियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर नशे के दुष्प्रभावों और उससे दूर रहने का संदेश दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि नशे से मुक्ति व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
विधिक साक्षरता शिविरों में उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी भी दी गई। पात्र व्यक्तियों को बताया गया कि वे किस प्रकार कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं और इसके लिए किन संस्थाओं से संपर्क कर सकते हैं।
नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों तक सही जानकारी पहुंचाने और नशा मुक्त वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि जनभागीदारी और संस्थागत प्रयास इसी तरह जारी रहें, तो नशे के खिलाफ सामूहिक अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।





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