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मुंगेली में परंपरा अनुसार हुआ केंद्रीय गोंड महासभा चक अध्यक्ष का चयन: नोहर केसर नियुक्त

मुंगेली (पब्लिक फोरम)। मुंगेली जिले में केंद्रीय गोंड महासभा के तत्वावधान में शनिवार को नए चक अध्यक्ष का गठन किया गया। पूर्व चक अध्यक्ष के निधन के बाद रिक्त हुए पद पर समाज की परंपराओं और रूढ़ियों के अनुरूप युवा समाजसेवी नोहर केसर का चयन किया गया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे तथा नव-नियुक्त अध्यक्ष को शुभकामनाएं दीं।
केंद्रीय गोंड महासभा जिला मुंगेली द्वारा आयोजित बैठक में नए चक अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पूरी की गई। जानकारी के अनुसार पूर्व चक अध्यक्ष के लिंगोवास (निधन) के बाद यह पद रिक्त हो गया था। समाज के परंपरागत नियमों और रीति-रिवाजों के अनुसार इस पद पर नए प्रतिनिधि के चयन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

परंपरा और सर्वसम्मति से हुआ चयन
बैठक में उपस्थित समाज के सगा जनों ने पुरखों द्वारा निर्धारित सामाजिक व्यवस्था, रूढ़ियों और परंपराओं का पालन करते हुए युवा साथी नोहर केसर को चक अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया। समाज के सदस्यों ने उन्हें मिलनसार, शिक्षित और सामाजिक कार्यों में सक्रिय युवा बताते हुए इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त माना।

बूढ़ादेव को साक्षी मानकर लिया आशीर्वाद
नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान गोंड समाज की आस्था के केंद्र बूढ़ादेव को साक्षी मानते हुए उनके समक्ष पूजा-अर्चना की गई और आशीर्वाद प्राप्त किया गया। समाज के वरिष्ठजनों ने नव-नियुक्त अध्यक्ष को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन समाज हित में करने का संदेश दिया।

युवाओं की भागीदारी को सकारात्मक संकेत
समाज के सदस्यों ने कहा कि युवाओं का नेतृत्व की भूमिका में आगे आना एक सकारात्मक संकेत है। इससे समाज के संगठनात्मक कार्यों को नई दिशा और ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। गोंड समाज के विभिन्न सदस्यों ने नोहर केसर और उनकी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

गोंड समाज जैसे पारंपरिक सामाजिक संगठनों में नेतृत्व परिवर्तन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि यह सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का भी प्रतीक माना जाता है। ऐसे चयन समाज की परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को जिम्मेदारियों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

मुंगेली में नए चक अध्यक्ष के रूप में नोहर केसर का चयन गोंड समाज की परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण है। यह निर्णय केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज में युवा भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा सकता है। आने वाले समय में समाज को उनसे संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक एकजुटता को आगे बढ़ाने की अपेक्षा रहेगी।

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