खरसिया पब्लिक फोरम)।छत्तीसगढ़ के खरसिया स्थित सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान एक 27 वर्षीय युवक की मौत के बाद भारी तनाव फैल गया है। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क पर चक्का जाम कर दिया है। उनकी स्पष्ट मांग है कि दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (First Information Report) दर्ज की जाए।
लापरवाही ने ली एक और जान
प्राप्त जानकारी के अनुसार
पिता राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि छोटे बेटे ताम्रेश्वर शर्मा को खूनी दस्त होने पर खरसिया सिविल अस्पताल के डाक्टर विक्रम राठिया से जांच कराई। जांच के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की जरुरत बताई। इस पर पिता ने आपरेशन के लिए सहमति दे दी। गुरुवार ताम्रेश्वर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। पिता ऑपरेशन थियेटर के गेट पर अपने बेटे का आपरेशन पूरा होने का इंतजार करते रहे। कुछ समय बाद आपरेशन थिएटर से निकले डाक्टर और उनके सहयोगी नर्स ने पिता को बताया गया कि ताम्रेश्वर को होश नहीं आ रहा है उसे मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर किया जाएगा। इसके बाद पिता मरीज को लेकर रायगढ़ पहुंचे। यहां बताया गया कि तम्रेश्वर की मौत खरसिया में ही हो गई थी। इस बात की जानकारी से परिजन आक्रोशित हुए और खरसिया अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे। नौजवान की मृत्यु से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया। इसकी जानकारी होने पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति पर काबू पाने की कोशिश करती रही। पिता का आरोप है कि पुत्र की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही से हुई है। पुत्र को केवल पाइल्स की शिकायत थी। इसके आपरेशन से किसी की मृत्यु नहीं होती। 27 साल के युवक की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही के कारण हुई है।
सड़क पर उतरा परिजनों का गुस्सा
मौत की खबर जैसे ही बाहर आई, अस्पताल परिसर का माहौल शोक और फिर भीषण गुस्से में बदल गया। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर मुख्य मार्ग पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया है। यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है और स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और भीड़ को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- लापरवाही बरतने वाले संबंधित डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज हो।
- ड्यूटी पर मौजूद दोषी स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए।
- पीड़ित परिवार को न्याय और शासन की ओर से उचित मुआवजा मिले।
सियासी हस्तक्षेप और न्यायिक जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा भी अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। उन्होंने सड़क पर बैठे पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की। सुनील शर्मा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, “यह किसी एक युवक की मौत नहीं, बल्कि हमारी पूरी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी है। हम इस मामले में कोई भी लीपापोती बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए।”
आम आदमी की बेबसी और टूटते सपने
27 वर्ष की आयु किसी भी युवा के लिए अपने और अपने परिवार के सपनों को साकार करने का समय होता है। यह युवक संभवतः अपने घर का मुख्य कमाने वाला (Breadwinner) था, जिस पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी। आज उसके माता-पिता का सड़क की धूल में बैठकर न्याय की भीख मांगना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह उन हजारों आम नागरिकों की बेबसी का प्रतीक है जो महंगे निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते। वे विश्वास और मजबूरी के साथ सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन वहां उन्हें इलाज के बजाय अगर मौत मिले, तो यह पूरे समाज के माथे पर कलंक है।
खरसिया की यह हृदयविदारक घटना हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में मौजूद खामियों और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। प्रशासन को तुरंत एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। यदि पीड़ित परिवार को समय रहते न्याय नहीं मिला, तो आम नागरिक का सरकारी व्यवस्था से बचा-खुचा विश्वास भी टूट जाएगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही इस दिशा में पहला कदम होना चाहिए।





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