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बिहार को मिलेगी अपनी क्रिकेट टीम? वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने किया अनकंडीशनल सपोर्ट का ऐलान

ईशान किशन, वैभव सूर्यवंशी और साकिब हुसैन की मिट्टी को अब वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर देने का सपना

नई दिल्ली/पटना (पब्लिक फोरम)। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट में साफ शब्दों में कहा कि बिहार की अपनी क्रिकेट टीम होनी चाहिए और इसके लिए वे बिना किसी शर्त के पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। अनिल अग्रवाल का यह बयान बिहार के लाखों क्रिकेट प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों के लिए एक नई उम्मीद की तरह आया है।

बिहार की माटी, देश के सितारे
अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में बिहार की क्रिकेट प्रतिभा का जिक्र करते हुए तीन नामों को खास तौर पर याद किया।

– ईशान किशन – पटना में जन्मे इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने वनडे क्रिकेट में सबसे कम गेंदों में दोहरा शतक जड़कर इतिहास रचा।
– वैभव सूर्यवंशी – समस्तीपुर के इस युवा बल्लेबाज ने सबसे कम उम्र में आईपीएल में डेब्यू कर पूरे देश का ध्यान खींचा।
– साकिब हुसैन – गोपालगंज के एक साधारण परिवार से निकले इस तेज गेंदबाज की धारदार गेंदबाजी पर आज दुनिया भर की नजरें टिकी हैं।

इन तीनों नामों को सामने रखकर वेदांता सुप्रीमो ने एक बड़ा सवाल उठाया – “जब बिहार की मिट्टी ने इतने शानदार खिलाड़ी दिए हैं, तो बिहार को क्रिकेट में वह पहचान क्यों नहीं मिली जिसका वह हकदार है?”

“बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, एक इमोशन है”
श्री अग्रवाल ने चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि बिहार की अपनी ऐसी कोई टीम क्यों नहीं है। उन्होंने लिखा कि बिहार के खिलाड़ियों को वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं बिहार में ही मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें प्रतिभा साबित करने के लिए राज्य छोड़कर न जाना पड़े। उन्होंने भरोसा जताया कि सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलने पर बिहार की टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बन सकती है।
अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने भावुक होते हुए लिखा – “बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक इमोशन है।”

उम्मीद या सिर्फ ऐलान?

अनिल अग्रवाल बिहार के बेगूसराय जिले से ताल्लुक रखते हैं और खनन व धातु उद्योग में वेदांता समूह को वैश्विक पहचान दिलाने वाले इस उद्योगपति एवं निवेशक की बिहार से जुड़ाव की बात नई नहीं है। लेकिन इस बार उनका यह ऐलान इसलिए अहम है क्योंकि यह केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि संसाधन और समर्थन देने का स्पष्ट वादा है।

हालांकि, यह भी उतना ही जरूरी है कि यह सपना महज सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित न रहे। बिहार के उन हजारों युवाओं को जमीनी सहयोग चाहिए जो गांव-गांव में टूटे मैदानों पर, टेप की गेंद से, बिना किसी कोचिंग के क्रिकेट खेलने का सपना देखते हैं।

अगर अनिल अग्रवाल का यह समर्थन ठोस रूप लेता है – चाहे वह प्रशिक्षण अकादमी हो, आईपीएल फ्रेंचाइजी हो या राज्य स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर – तो यह बिहार के क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन और राज्य सरकार की भूमिका भी इसमें निर्णायक होगी।
“फिलहाल, पटना के किसी मैदान पर धूप में पसीना बहाता वह युवा क्रिकेट खिलाड़ी जरूर इस खबर को पढ़कर मुस्कुरा रहा होगा – और शायद उसके सपने में आज थोड़ा रंग और भर गया हो।”

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