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वेदांता समूह की प्रमुख चेहरा प्रिया अग्रवाल हेब्बर का बालको दौरा रद्द, सिंघीतराई संयंत्र हादसे पर जताया दुख

कोरबा (पब्लिक फोरम)। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष और वेदांता समूह की प्रमुख चेहरा प्रिया अग्रवाल हेब्बर का प्रस्तावित दो दिवसीय बालको दौरा अपरिहार्य कारणों के चलते अचानक रद्द कर दिया गया है। संयंत्र की प्रगति और संचालन की समीक्षा के लिए निर्धारित यह दौरा अब अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।

दौरे का उद्देश्य और अचानक बदलाव
सूत्रों के अनुसार, प्रिया अग्रवाल हेब्बर की यह यात्रा बालको (भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड) में चल रही विभिन्न परियोजनाओं के निरीक्षण और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय चर्चा के लिए तय की गई थी। तयशुदा कार्यक्रम के तहत वे संयंत्र में उत्पादन, विस्तार योजनाओं और प्रबंधन की समग्र स्थिति का जायजा लेने वाली थीं।

प्रबंधन के करीबी सूत्रों का कहना है कि दौरे की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं – अधिकारियों की बैठकें तय थीं, प्रस्तुतियां तैयार थीं और संयंत्र परिसर में स्वागत का इंतजाम भी किया जा रहा था। ऐसे में इस अचानक बदलाव ने बालको प्रबंधन और कर्मचारियों दोनों को चौंका दिया।

सक्ती-सिंघीतराई प्लांट हादसे पर गहरी संवेदना
दौरे के रद्द होने की खबर के साथ-साथ एक और बड़ी खबर सामने आई है। सक्ती जिले के सिंघीतराई में स्थित “वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट (वीएलसीटीपीपी)” में हाल ही में हुए एक दुखद हादसे को लेकर प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।

उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति जताते हुए इस घटना को अत्यंत दुखद बताया है। हालांकि उन्होंने प्रभावित श्रमिकों की हितों के लिए आगे की कार्रवाई या मुआवजे को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी प्रबंधन प्रभावित परिवारों के साथ संपर्क में है।

आम कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह दौरा?
बालको संयंत्र में काम करने वाले हजारों कर्मचारी, सेवानिवृत्त कामगार व शांतिनगर के संघर्षरत परिवार इस दौरे को एक अवसर के रूप में देख रहे थे। सेवानिवृत कामगार परिवार की बरसों से बंद चली आ रही चिकित्सा सुविधाओं की पुनर्बहाली की मांग, आवासीय विवाद, सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मामले, बालको नगर स्थित छोटे व्यापारियों को हटाए जाने के विवादित मुद्दे, कूलिंग टावर प्रदूषण से पैदा हुए शांति नगर के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजा के लंबित मुद्दे- ऐसे कई ज्वलंत मुद्दों पर शीर्ष प्रबंधन का ध्यान खींचने की एक उम्मीद इस दौरे से जुड़ी थी।

संयंत्र के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने निराशा जताते हुए कहा – “वेदांता-बालको के कामगारों की बात ऊपर तक पहुँचे, इसी का तो इंतजार रहता है। जब इतने बड़े अधिकारी आते हैं, तो लगता है शायद हमारी सुनवाई होगी और हमारी समस्याओं का समाधान भी निकलेगा।”

अब आगे क्या?
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रिया अग्रवाल हेब्बर का पुनर्निर्धारित बालको दौरा कब होगा। बालको प्रबंधन की ओर से भी इस विषय पर कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है।

जहां एक तरफ वेदांता सिंघीतराई संयंत्र हादसे की पीड़ा ताजा है, वहीं दूसरी तरफ बालको के हजारों श्रमिक और उनके परिवार यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जब भी यह दौरा होगा – उनकी आवाज़ें भी बालको के एजेंडे का हिस्सा जरूर बनेंगी।

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