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सक्ती वेदांता प्लांट हादसा: अपनों को खोने का दर्द और 35 लाख का मरहम; 17 मौतों के बाद वेदांता कंपनी द्वारा मुआवजे का ऐलान

सक्ती (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने 17 परिवारों के आंगन की हंसी हमेशा के लिए छीन ली है। कल दोपहर सिंघीतराई गांव स्थित प्लांट में बॉयलर से जुड़ी एक हाई-प्रेशर ट्यूब फटने से यह भीषण हादसा हुआ, जिसमें अब तक 17 मजदूरों की जान जा चुकी है और 19 जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जूझ रहे हैं। इस गहरे सदमे और चीख-पुकार के बीच, वेदांता पावर लिमिटेड ने प्रभावित परिवारों का हाथ थामते हुए मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने का बड़ा ऐलान किया है।

मुआवजा और मदद: कंपनी ने क्या कहा?
अपनों को खोने के दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन भविष्य की आर्थिक चिंताओं को कम करने के लिए कंपनी ने कुछ अहम कदम उठाए हैं। वेदांता प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।

मृतकों के परिजनों के लिए: हर मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार कंपनी में नौकरी दी जाएगी।

घायलों के लिए: जिंदगी की जंग लड़ रहे 19 घायलों को 15 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, जब तक वे पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते, उनका वेतन (सैलरी) लगातार जारी रहेगा।

मानसिक स्वास्थ्य का भी रखा ध्यान: हादसे का खौफनाक मंजर देखने वाले मजदूरों को मानसिक आघात से उबारने के लिए मुफ्त काउंसलिंग की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।

कंपनी ने अपने बयान में कहा, “हमारा पूरा ध्यान इस वक्त घायलों की जान बचाने और उन्हें बेहतर इलाज देने पर है। हम स्थानीय प्रशासन और मेडिकल टीमों के साथ मिलकर हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहे हैं।”

कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा खौफनाक पल था जिसने चंद सेकंड में जिंदगियां राख कर दीं। पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रफुल्ल ठाकुर ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कल दोपहर करीब 2:30 बजे डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई गांव स्थित प्लांट में अचानक जोरदार धमाका हुआ। यह धमाका बॉयलर से टरबाइन तक हाई-प्रेशर भाप (स्टीम) ले जाने वाली एक ट्यूब के फटने से हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

रोजी-रोटी की तलाश में आए थे मजदूर, अब कफन में लौटेंगे
हादसे का शिकार हुए मजदूर सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, वे किसी के पिता, किसी के बेटे और किसी के भाई थे। ये वो लोग थे जो दो वक्त की रोटी और अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से यहां पसीना बहाने आए थे। मृतकों में 5 पश्चिम बंगाल, 5 छत्तीसगढ़ (तीन सक्ती, एक जांजगीर और एक रायगढ़), 3 झारखंड, 2 बिहार और 2 उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।

अब तक जिन मृतकों की पहचान हो पाई है, वे हैं:-

🔹रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार)
🔹अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़)
🔹 ठंडाराम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़)
🔹तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड)
🔹आकिब खान (दरभंगा, बिहार)
🔹सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल)
🔹अब्दुल करीम (झारखंड)
🔹उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़)
🔹शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल)

रुपये भर सकते हैं पेट, लेकिन वो खालीपन कैसे भरेगा?
वेदांता कंपनी द्वारा उठाया गया यह कदम निश्चित रूप से एक मानवीय पहल है। 35 लाख रुपये और एक पक्की नौकरी इन परिवारों को दर-दर की ठोकरें खाने से बचा लेगी। यह घायलों के लिए भी एक बड़ी राहत है कि इलाज के दौरान उनके घर का चूल्हा बुझने नहीं पाएगा।

लेकिन इस हादसे ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि औद्योगिक विकास की इस अंधी दौड़ में एक मजदूर की जान की कीमत क्या है? मुआवजे के चेक उन माताओं के आंसू नहीं पोंछ सकते, जिन्होंने अपने जवान बेटों को खोया है। वह नौकरी उस बच्चे के सिर पर पिता का साया नहीं लौटा सकती। यह हादसा सिस्टम और कंपनियों के लिए एक कड़ा सबक होना चाहिए कि ‘सुरक्षा’ सिर्फ कागजों या नोटिस बोर्ड तक सीमित न रहे। उम्मीद है कि भविष्य में हर औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों को इतनी सख्ती से लागू किया जाएगा कि कोई और परिवार इस तरह उजड़ने को मजबूर न हो।

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