सक्ती जिले के सिंघीतराई में भीषण औद्योगिक दुर्घटना – 25 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से घायल, मुआवजे और कड़ी कार्रवाई की मांग
रायपुर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई गांव में स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुई भीषण औद्योगिक दुर्घटना ने एक बार फिर मजदूरों की जान की कीमत को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस हादसे में अब तक 15 मजदूरों की मौत हो चुकी है और लगभग 25 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं।
इस दर्दनाक हादसे पर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) की छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने गहरे दुख और तीव्र क्षोभ के साथ कहा है कि छत्तीसगढ़ के कारखाने मजदूरों के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं।
मुनाफे की होड़ में दफन हो रही हैं जिंदगियां
ऐक्टू का कहना है कि देशभर में औद्योगिक दुर्घटनाओं का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। श्रमिक मर रहे हैं, घायल हो रहे हैं – लेकिन सरकार और प्रशासन की आंखें बंद हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि कंपनी मालिक अधिक से अधिक मुनाफा कमाने की दौड़ में सुरक्षा के मानदंडों और श्रम कानूनों को पूरी तरह ताक पर रख देते हैं।
“मजदूरों को बिना उचित प्रशिक्षण के खतरनाक कामों पर लगाया जाता है। घायल होने पर उनका समुचित इलाज तक नहीं होता। कंपनी मालिक, ठेकेदार और सरकार – तीनों ने मिलकर श्रमिकों के साथ न्यूनतम मानवीय व्यवहार करना भी बंद कर दिया है,” – ऐक्टू की राज्य कमेटी ने अपने बयान में कहा।
ऐक्टू की मांगें – जवाबदेही और इंसाफ
ऐक्टू के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी ने सरकार और प्रशासन से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:-
– घायल श्रमिकों को तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
– मृतक श्रमिकों के परिजनों को उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
– वेदांता कंपनी प्रबंधन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
– औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानदंडों और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
– सभी श्रमिकों को उचित मजदूरी, समुचित प्रशिक्षण और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए जाएं।
यह सवाल पूरे देश का है
वेदांता का नाम छत्तीसगढ़ के मजदूर आंदोलन के लिए कोई नया नहीं है। बालको से लेकर सक्ती तक – इस कॉरपोरेट समूह पर श्रमिक अधिकारों की अनदेखी के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। लेकिन 15 मजदूरों की एक साथ मौत अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की घोर विफलता का प्रमाण है।
“जब तक मुनाफे को मजदूर की जान से ऊपर रखा जाएगा, ऐसे हादसे होते रहेंगे। सवाल यह है कि सरकार कब जागेगी – और कितनी और चिताएं जलने के बाद?”





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