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5 रुपये में पौष्टिक भोजन, कोरबा में श्रमिकों के जीवन को बदल रही शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना

कोरबा (पब्लिक फोरम)। श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना कोरबा जिले में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। श्रम विभाग द्वारा संचालित यह योजना पंजीकृत श्रमिकों को बेहद कम लागत में स्वच्छ, ताजा और संतुलित भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को मजबूत बना रही है।

इस योजना के तहत श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में प्रतिदिन पौष्टिक भोजन दिया जाता है। भोजन में 200 ग्राम पका हुआ चावल, 50 ग्राम दाल, 50 ग्राम सब्जी और 10 ग्राम अचार शामिल होता है। जरूरत के अनुसार खिचड़ी का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह का संतुलित आहार श्रमिकों को पूरे दिन काम करने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को सस्ती दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे कुपोषण से बच सकें और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो। नियमित भोजन मिलने से श्रमिकों को काम के बीच घर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनके समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है। साथ ही यह योजना श्रमिकों को श्रम विभाग में पंजीकरण के लिए भी प्रेरित करती है, जिससे वे बीमा, पेंशन और आवास सहायता जैसी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

कोरबा जिले में वर्तमान में इस योजना के तहत तीन भोजन केंद्र संचालित हो रहे हैं। बालको प्रोजेक्ट गेट और बुधवारी बाजार के पीछे स्थित केंद्रों में सुबह और दोपहर दोनों समय भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जहां प्रतिदिन करीब 400 श्रमिक भोजन करते हैं। वहीं पताढ़ी स्थित कोरबा पावर लिमिटेड केंद्र में दोपहर के समय भोजन की व्यवस्था है, जहां लगभग 200 श्रमिक लाभान्वित हो रहे हैं।

बालको कंपनी में कार्यरत श्रमिक अजय का कहना है कि इस योजना से उनकी दिनचर्या आसान हो गई है। अब उन्हें भोजन के लिए घर नहीं जाना पड़ता और कम कीमत में गरम और स्वादिष्ट भोजन मिल जाता है। अन्य श्रमिक भी इस योजना को अपने लिए राहत भरी पहल मानते हैं, क्योंकि इससे उन्हें कार्यस्थल के पास ही घर जैसा भोजन मिल रहा है।

इस योजना के प्रभाव से श्रमिकों के जीवन में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्हें नियमित और संतुलित भोजन मिल रहा है, जिससे उनकी थकान कम हो रही है और काम करने की क्षमता बढ़ रही है। यह पहल न केवल उन्हें भोजन उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

श्रम विभाग की यह योजना यह साबित करती है कि जब श्रमिकों के स्वास्थ्य और जरूरतों का ध्यान रखा जाता है, तब समाज और विकास की नींव और मजबूत होती है। यह पहल वास्तव में श्रमिक कल्याण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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