झारखंड (पब्लिक फोरम)। आदिवासी समुदायों को धर्म के आधार पर विभाजित करने की कोशिशों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा छीनने की चेतावनी के बीच आदिवासी संघर्ष मोर्चा (एएसएम) ने अपनी रणनीति और तेज कर दी है। 5 जून 2026 को हुई ऑनलाइन राष्ट्रीय बैठक में देशभर में “आदिवासी एकता अभियान” चलाने का निर्णय लिया गया। यह अभियान 9 जून – बिरसा मुंडा शहादत दिवस – से शुरू होकर 30 जून – हुल दिवस – तक चलेगा।
जनजाति सुरक्षा मंच और विभाजन की राजनीति
बैठक में सबसे पहले उस ताजा राजनीतिक घटनाक्रम की समीक्षा की गई जिसने आदिवासी समाज में गहरी बेचैनी पैदा की है। बैठक में आरएसएस द्वारा गठित “जनजाति सुरक्षा मंच” की गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई गई। एएसएम का मानना है कि यह मंच विभिन्न राज्यों में हिंदू आदिवासियों और अन्य धर्मावलंबी आदिवासियों के बीच फूट डालने के उद्देश्य से बनाया गया है।
हाल ही में दिल्ली में जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित एक रैली में 30,000 से अधिक आदिवासियों की उपस्थिति बताई गई। इस रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कथित तौर पर यह वादा किया कि जो आदिवासी हिंदू धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करेगा, उसका एसटी आरक्षण का दर्जा समाप्त कर दिया जाएगा। एएसएम ने इस बयान को आदिवासी पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
विस्थापन और जल-जंगल-जमीन का सवाल
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि आदिवासियों पर होने वाले हमले केवल धर्मांतरण के सवाल तक सीमित नहीं हैं। ओडिशा के “सिजिमाली” और मध्य प्रदेश में “केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना” के विरुद्ध चल रहे संघर्षों की विस्तार से समीक्षा हुई। इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर आदिवासी विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।
“अंडमान की परियोजना” को बैठक में विशेष चिंता का विषय बताया गया। आदिवासी संघर्ष मोर्चा के अनुसार इस परियोजना से “शोम्पेन” जनजाति – जो अंडमान-निकोबार के सुदूर जंगलों में रहने वाली एक अत्यंत संवेदनशील आदिम जनजाति है – के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है।
बैठक के प्रमुख निर्णय
बैठक में चर्चा के बाद निम्नलिखित ठोस कार्यक्रमों पर सहमति बनी:
🔹1. आदिवासी एकता अभियान (9–30 जून 2026)
बिरसा मुंडा शहादत दिवस से हुल दिवस तक चलने वाले इस अभियान में आदिवासी संघर्ष मोर्चा के पर्चे और पोस्टर वितरित किए जाएंगे तथा देशभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे।
🔹2. सदस्यता अभियान
इसी अवधि में एएसएम की सदस्यता अभियान भी समानांतर चलाया जाएगा ताकि संगठन का आधार और मजबूत हो।
🔹3. झारखंड में राष्ट्रीय महाअधिवेशन
नवंबर 2026 के आसपास झारखंड में आदिवासी संघर्ष मोर्चा का एक बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम होगा, जिसमें सभी राज्यों के सदस्य भाग लेंगे।
🔹4. नियमित मासिक बैठक
संगठन की सक्रियता बनाए रखने के लिए हर महीने के पहले शुक्रवार को बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। अगली बैठक 3 जुलाई 2026, शाम 6 बजे निर्धारित है।
आदिवासी समाज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ एक तरफ धार्मिक आधार पर विभाजन की कोशिशें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ जल, जंगल और जमीन पर उनके परंपरागत अधिकारों को विकास परियोजनाओं के नाम पर सिकोड़ा जा रहा है। बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे शहीदों की विरासत को याद करते हुए आदिवासी संघर्ष मोर्चा का यह अभियान केवल एक संगठन की गतिविधि नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक प्रश्न की पुनर्घोषणा है – कि आदिवासी पहचान, अधिकार और अस्तित्व किसी भी राजनीतिक सौदेबाजी का विषय नहीं बन सकते।





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