किसान महासभा सम्मेलन में एमएसपी, कर्जमाफी और भारत-अमेरिका समझौते का मुद्दा
कृषि संकट और किसान हितों पर मंथन
रायपुर (पब्लिक फोरम)। अखिल भारतीय किसान महासभा का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन 20 और 21 सितंबर को पंजाब के जालंधर शहर स्थित देशभक्त यादगार हाल में आयोजित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ इकाई ने सम्मेलन के माध्यम से कृषि संकट, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमाफी, बिजली और कृषि क्षेत्र के निजीकरण सहित कई मुद्दों पर देशव्यापी जनसंघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। संगठन ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कृषि और किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग भी उठाई है।
अखिल भारतीय किसान महासभा, छत्तीसगढ़ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जालंधर में होने वाला पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब देश का कृषि क्षेत्र कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। संगठन ने किसानों की बढ़ती लागत, फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने, कर्ज और ग्रामीण पलायन को कृषि संकट के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
महासभा ने कहा कि खेती में बीज, खाद, डीजल, कीटनाशक, पानी और बिजली की लागत बढ़ने के मुकाबले किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल रहा है। संगठन के अनुसार, इससे किसानों को कई बार कम कीमत पर फसल बेचने और निजी साहूकारों या वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आपत्ति
किसान महासभा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का दावा है कि इस तरह के समझौते का असर सोयाबीन, कपास, सूखे मेवे, फल, दूध-डेयरी, मछली और मुर्गीपालन से जुड़े किसानों पर पड़ सकता है।
महासभा ने इसे कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा है कि इससे भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों की भूमिका बढ़ सकती है और छोटे तथा मध्यम किसानों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ेगा।
हालांकि, इन दावों को समाचार में तथ्य के रूप में स्थापित करने के लिए संबंधित व्यापार समझौते की वास्तविक शर्तों, कृषि उत्पादों पर प्रस्तावित शुल्क, आयात व्यवस्था और सरकार की आधिकारिक स्थिति को अलग से देखना जरूरी होगा। प्रेस नोट में इन बिंदुओं के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
तीन कृषि कानूनों के आंदोलन का भी उल्लेख
संगठन ने अपने बयान में पिछले किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा है कि तीन कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए चले आंदोलन की सफलता के बाद चौथा राष्ट्रीय सम्मेलन बिहार के बिक्रमगंज में आयोजित किया गया था।
महासभा का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसान आंदोलन को फिर व्यापक स्तर पर मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए विभिन्न किसान संगठनों के बीच एकता को महत्वपूर्ण बताया गया है।

जम्हूरी किसान यूनियन के विलय को बताया महत्वपूर्ण
किसान महासभा के अनुसार, जालंधर सम्मेलन के दौरान जम्हूरी किसान यूनियन का किसान महासभा में विलय एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। संगठन का दावा है कि इससे पंजाब सहित अन्य राज्यों में किसान संगठनों की एकजुटता मजबूत होगी और आंदोलन की क्षमता बढ़ेगी।
बयान में महाराष्ट्र और झारखंड के समान विचार रखने वाले किसान संगठनों के महासभा से जुड़ने का भी उल्लेख किया गया है। महासभा का मानना है कि इससे संयुक्त किसान मोर्चा की वैचारिक और आंदोलनात्मक क्षमता को मजबूती मिल सकती है।
एमएसपी और कर्जमाफी प्रमुख मांगों में
किसान महासभा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी को प्रमुख मांगों में शामिल किया है। संगठन ने कहा है कि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिलने की व्यवस्था किए बिना कृषि संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
इसके अलावा बिजली कानून वापस लेने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने, खाद-बीज-डीजल और कीटनाशकों की लागत कम करने तथा सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग की गई है।
बीज, अनाज व्यापार और भंडारण के निजीकरण का विरोध
महासभा ने बीज क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भूमिका का विरोध करते हुए बीज विधेयक वापस लेने की मांग की है। साथ ही अनाज के व्यापार और भंडारण के निजीकरण को रोकने की बात कही गई है।
संगठन का तर्क है कि बीज, कृषि उत्पादन, भंडारण और बाजार पर बड़ी कंपनियों का नियंत्रण बढ़ने से छोटे किसानों की निर्भरता बढ़ सकती है। यह संगठन का नीतिगत मत है; इसके प्रभाव की वास्तविक सीमा संबंधित कानूनों, नीतियों और बाजार संरचना के आधार पर तय होगी।
आवारा पशुओं और फसल नुकसान का मुद्दा भी उठाया
किसान महासभा ने आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते हुए प्रभावी व्यवस्था की मांग की है। संगठन ने पशु संबंधी कानूनों में बदलाव तथा फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग रखी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा कई राज्यों में किसानों की व्यावहारिक समस्या रही है। महासभा ने इसे विशेष रूप से सब्जी, मक्का और दलहन-तिलहन उत्पादकों की परेशानी से जोड़कर देखा है।
बटाईदार किसानों के पंजीकरण की मांग
संगठन ने बटाईदार किसानों को किसान का दर्जा देने और उन्हें सरकारी योजनाओं तथा सुविधाओं के दायरे में लाने की मांग की है। इसके लिए बटाईदार किसानों के पंजीकरण की व्यवस्था करने की बात कही गई है।
यह मांग कृषि नीति के उस महत्वपूर्ण पक्ष से जुड़ी है, जिसमें जमीन का स्वामित्व किसी दूसरे व्यक्ति के पास होने के बावजूद खेती का वास्तविक काम कोई अन्य व्यक्ति करता है। ऐसे किसानों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए उनकी पहचान और पंजीकरण महत्वपूर्ण माना जाता है।
शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी जोर
किसान महासभा ने किसानों के मुद्दों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों को भी अपने अभियान से जोड़ने की बात कही है। संगठन ने स्कूलों की व्यवस्था सुधारने, पेपर लीक रोकने, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई और रोजगार की गारंटी की मांग की है।
बयान में युवाओं और छात्रों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए किसान-मजदूर आंदोलन के साथ उनकी एकजुटता बढ़ाने की अपील की गई है।
महासभा ने संविधान और लोकतंत्र पर कथित हमलों, जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग तथा आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं की गिरफ्तारी का भी विरोध किया है। इन मामलों में संगठन ने सरकार से अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और जेल में बंद छात्रों-युवाओं को रिहा करने की मांग की है।
जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के निजीकरण का विरोध
किसान महासभा ने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के निजीकरण का विरोध करते हुए भूमि अधिग्रहण और कथित भूमि लूट के अभियानों को रोकने की मांग की है। छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के संदर्भ में यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है, जहां औद्योगिक परियोजनाओं, खनन, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है।
संगठन ने संविधान में मिले अधिकारों और कमजोर वर्गों तथा आदिवासी समुदायों की सुरक्षा की भी मांग उठाई है।
14 सूत्रीय मांगें
अखिल भारतीय किसान महासभा ने सम्मेलन के माध्यम से निम्न मांगों पर जनसंघर्ष तेज करने का आह्वान किया है—
1. संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हुए समझौते को लागू किया जाए।
2. एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।
3. बिजली विधेयक वापस लिया जाए और बिजली का निजीकरण रोका जाए।
4. किसानों का कर्ज माफ किया जाए।
5. बीज विधेयक वापस लिया जाए और बीज बाजार से विदेशी कंपनियों की भूमिका खत्म की जाए।
6. खाद, बीज, डीजल और कीटनाशक सस्ते किए जाएं तथा सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो।
7. अनाज के व्यापार और भंडारण का निजीकरण रोका जाए।
8. आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जाए और फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
9. जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के निजीकरण पर रोक लगे तथा मनरेगा को मजबूत किया जाए। बटाईदार किसानों का पंजीकरण कर उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
10. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाए तथा पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो।
11. संविधान और लोकतंत्र पर कथित हमले बंद किए जाएं तथा जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर रोक लगे।
12. सांप्रदायिक हिंसा पर रोक और कमजोर वर्गों तथा आदिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
13. विध्य कॉरिडोर सहित भूमि अधिग्रहण से जुड़े अभियानों को रोका जाए।
14. संगठन के अनुसार किसान और देश के हितों के खिलाफ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द किया जाए।
सम्मेलन की सफलता के लिए सदस्यता अभियान का आह्वान
किसान महासभा की छत्तीसगढ़ इकाई ने 20-21 सितंबर को जालंधर में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं और समर्थकों से व्यापक भागीदारी की अपील की है। संगठन ने घर-घर जाकर सदस्य बनाने, सहयोग जुटाने और सम्मेलन के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया है।
जालंधर का किसान महासभा सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब कृषि की लागत, किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, भूमि अधिकार और कृषि बाजार की संरचना पर देश में लगातार बहस जारी है। सम्मेलन में उठाए गए मुद्दे केवल किसानों तक सीमित नहीं हैं; उनका संबंध खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी है। इन मांगों पर आगे की बहस का आधार राजनीतिक आरोपों के बजाय नीतियों के वास्तविक प्रभाव, आधिकारिक आंकड़ों और किसानों के अनुभवों को बनाना ही लोकतांत्रिक विमर्श को अधिक सार्थक बनाएगा।






Recent Comments