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महतारी वंदन ई-केवाईसी: 9 रुपए में सेवा, लेकिन इस सेवा का सम्मान कहां?

– सीएससी संचालकों पर दबाव, सर्वर की मार और “संपन्न” हितग्राहियों का सवाल

रायपुर/कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी “महतारी वंदन योजना” के तहत पात्र महिलाओं का ई-केवाईसी अभियान इन दिनों पूरे प्रदेश में जोरों पर है। शासन ने यह प्रक्रिया पूर्णतः निशुल्क घोषित की है और इसे अंजाम देने की जिम्मेदारी “कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों” को सौंपी गई है। लेकिन जमीनी हकीकत उतनी सरल नहीं है जितनी कागज़ों पर दिखती है। प्रति सफल केवाईसी मात्र “9 रुपए का भुगतान”, राजनीतिक दबाव, सर्वर की लगातार खराबी और हितग्राहियों का दुर्व्यवहार – इन सबके बीच सीएससी संचालक किसी योद्धा की तरह अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

9 रुपए – एक संख्या, एक मज़ाक
सरकारी जानकारी के अनुसार प्रत्येक “सफल ई-केवाईसी” पर सीएससी संचालक को लगभग 9 रुपए का भुगतान किया जाएगा। लेकिन यह भुगतान कब होगा – इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा संचालकों को नहीं बताई गई है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि “जिन हितग्राहियों का केवाईसी किसी कारणवश रिजेक्ट हो जाता है”, उनके लिए कोई राशि मिलेगी या नहीं – यह भी अंधेरे में है।
जब सीएससी केंद्र पर ई-केवाईसी कराने आई महतारी वंदन योजना की हितग्राहियों से इस 9 रुपए की बात बताई गई, तो उनके चेहरे पर पहले हैरानी आई, फिर चिंता।

“9 रुपए में आजकल क्या मिलता है साहब? बच्चे का चॉकलेट-कुरकुरे भी नहीं आता। इतने कम में ये लोग हमारा काम कर रहे हैं – सरकार को सोचना चाहिए।”
एक हितग्राही महिला ने सीधे शब्दों में कहा – “जब सरकार हमें हर महीने 1000 रुपए दे सकती है, तो सीएससी वाले भाई को भी एक सम्मानजनक राशि मिलनी चाहिए। आज खाना पकाने का तेल भी 150 रुपए लीटर है – 9 रुपए तो सच में एक मज़ाक है।”

दबाव की राजनीति: “हमारे लोगों का पहले करो, वरना सेंटर बंद करवा देंगे”

सीएससी संचालकों ने एक और परेशान करने वाली बात साझा की। कुछ ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो खुद को “किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि या सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर” बताते हैं और अपने परिचितों का केवाईसी प्राथमिकता से कराने का दबाव बनाते हैं।

इससे भी आगे – वे लोगों में यह प्रचार कर रहे हैं कि “पर्ची (प्रिंटआउट) भी बिल्कुल मुफ्त में माँग लो।” जबकि वास्तविकता यह है कि केवाईसी प्रक्रिया निशुल्क है, लेकिन पर्ची प्रिंट करने पर होने वाला खर्च संचालक की अपनी जेब से जाता है। फिर भी इसे भी मुफ्त देने का दबाव बनाया जा रहा है।
और अगर संचालक इनकार करे? तो धमकी मिलती है – “सेंटर बंद करवा देंगे।”

सर्वर डाउन, लोग नाराज़ – बीच में पिसते संचालक
तकनीकी मोर्चे पर भी स्थिति कठिन है। सर्वर बार-बार बंद हो जाने से केवाईसी प्रक्रिया रुक जाती है। इंतजार कर रहे हितग्राही असंतुष्ट हो जाते हैं और कई बार “दुर्व्यवहार” तक पर उतर आते हैं – जबकि इसमें संचालक की कोई गलती नहीं होती।
फिर भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से सीएससी संचालक यह काम पूरी निष्ठा और गंभीरता से कर रहे हैं। यह उनके समर्पण का प्रमाण है।

अपनी कार में आए “ज़रूरतमंद” – सिस्टम की खामी का आईना!

इस पूरी रिपोर्टिंग के दौरान एक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। कुछ ई-केवाईसी कराने आए हितग्राही “अपनी कार में सवार होकर” आए थे। उनकी वेशभूषा, बातचीत का तरीका और रहन-सहन स्पष्ट रूप से आर्थिक संपन्नता की ओर इशारा कर रहा था।

सवाल स्वाभाविक है – “महतारी वंदन योजना आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए बनाई गई है।” लेकिन यदि सिस्टम की खामियों के चलते संपन्न परिवारों की महिलाएं भी इसका लाभ उठा रही हैं, तो वह राशि किसी ज़रूरतमंद की थाली से छीनी जा रही है। यह एक गंभीर नीतिगत चूक है जिस पर सरकार को तत्काल ध्यान देने की ज़रूरत है।

सेवा का सम्मान होना ही चाहिए
महतारी वंदन योजना का उद्देश्य नेक है – प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक सहारा देना। लेकिन इस योजना की सफलता उन “हज़ारों सीएससी संचालकों” के कंधों पर टिकी है जो 9 रुपए में, दबाव झेलते हुए, सर्वर की मार सहते हुए, बिना किसी निश्चित समयसीमा के भुगतान की उम्मीद में यह काम कर रहे हैं।

सरकार से अपील है – “इन संचालकों को सम्मानजनक और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए।” साथ ही, योजना की पात्रता जाँच को भी और कड़ा किया जाए ताकि सही हाथों तक सही मदद पहुँचे।
क्योंकि जब तक सेवा करने वाले का सम्मान नहीं होगा – किसी भी योजना की नींव कमज़ोर ही रहेगी।

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