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छोटे उद्यमियों को संगठित करने की नई पहल: बना ‘लघु उद्यमी समूह’

फुटपाथ से गांव तक, छोटे कारोबारियों की नई एकजुट आवाज़
लघु उद्यमी समूह देगा छोटे कारोबारियों को सामूहिक मंच

रायपुर/कोरबा (पब्लिक फोरम)। छोटे स्वरोजगार से जुड़े लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘लघु उद्यमी समूह’ के गठन की पहल की गई है। यह संगठन सड़क और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले स्ट्रीट वेंडरों, फल सब्जी विक्रेताओं, गांव-कस्बों के छोटे दुकानदारों, घरेलू उत्पाद तैयार करने वाले कुटीर उद्यमियों तथा विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार से जुड़े लोगों को संगठित करने का प्रयास कर रहा है। संगठन का दावा है कि इसका उद्देश्य छोटे उद्यमियों के अधिकारों की रक्षा, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना और प्रशासन के समक्ष उनकी सामूहिक आवाज़ को मजबूत बनाना है।

भारत की अर्थव्यवस्था में छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की बड़ी भूमिका है। शहरों की सड़कों पर ठेला-खोमचा लगाने वाले विक्रेता हों, गांवों की किराना दुकानें चलाने वाले परिवार, घरों में सब्जी – पापड़, अचार, कपड़े या हस्तशिल्प तैयार कर बेचने वाली महिलाएं, अथवा नाई, दर्जी, मैकेनिक और फेरीवाले – इन सभी की आजीविका छोटे पैमाने के व्यवसाय पर निर्भर करती है। इसके बावजूद इन वर्गों को अक्सर प्रशासनिक कार्रवाई, पूंजी की कमी, योजनाओं की जानकारी के अभाव और सामाजिक सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गठित ‘लघु उद्यमी समूह’ स्वयं को एक गैर-राजनैतिक, गैर-लाभकारी और जनहितकारी संगठन के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। संगठन का कहना है कि वह छोटे उद्यमियों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ उनके वैधानिक अधिकारों और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास करेगा।

संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में प्रशासन, औद्योगिक क्षेत्र में कंपनियों की मनमानी और पुलिस की कथित अनुचित कार्रवाई के दौरान प्रभावित उद्यमियों को सामूहिक सहयोग उपलब्ध कराना शामिल है। साथ ही स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट (Street Vendors Act – सड़क विक्रेता संरक्षण कानून), एमएसएमई (MSME – सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम), उद्यम पंजीकरण तथा पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi – प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना) जैसी योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

संगठन का कहना है कि वेंडिंग जोन, लाइसेंस, व्यापार स्थल और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष छोटे उद्यमियों का सामूहिक प्रतिनिधित्व किया जाएगा। इसके अलावा सदस्यों के लिए आपसी सहयोग कोष, बचत योजनाएं, संकट के समय सहायता, कौशल विकास, ऋण और बीमा जैसी सुविधाओं तक पहुंच बनाने का भी प्रयास किया जाएगा।

प्रस्तावित सदस्यता अभियान में विभिन्न वर्गों के स्वरोजगार से जुड़े लोगों को शामिल होने का आह्वान किया गया है। इनमें विशेष रूप से शामिल हैं –

– सड़क और फुटपाथ पर ठेला या खोमचा लगाने वाले विक्रेता।
– गांव और कस्बों में छोटी दुकान या किराना स्टोर संचालित करने वाले व्यापारी।
– घरों में खाद्य सामग्री, वस्त्र या हस्तशिल्प तैयार कर बेचने वाले कुटीर उद्यमी।
– नाई, दर्जी, मैकेनिक, फेरीवाले तथा अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़े लोग।

सदस्य बनने के इच्छुक लोगों से अपने वार्ड, मोहल्ले या गांव के संयोजक से संपर्क करने, सदस्यता फॉर्म भरने और निर्धारित सदस्यता शुल्क जमा करने का आग्रह किया गया है। इसके बाद उन्हें सदस्यता पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा तथा नियमित बैठकों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि असंगठित क्षेत्र के छोटे उद्यमियों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बिखरी हुई स्थिति है। व्यक्तिगत स्तर पर वे अक्सर अपनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक नहीं पहुंचा पाते। ऐसे में यदि कोई संगठन पारदर्शी, लोकतांत्रिक और जनहितकारी ढंग से कार्य करता है तो वह संवाद और समाधान का एक उपयोगी माध्यम बन सकता है।

देश में स्वरोजगार और लघु उद्यम लाखों परिवारों की आय का आधार हैं। यदि छोटे उद्यमियों को कानूनी जानकारी, सामाजिक सुरक्षा और सामूहिक प्रतिनिधित्व का प्रभावी मंच मिलता है, तो इससे न केवल उनके व्यवसाय को स्थिरता मिल सकती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी मजबूती मिलने की संभावना है। संगठन ने अधिक से अधिक छोटे उद्यमियों से इस पहल से जुड़कर सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।

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