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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद AITUC ने शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों पर उठाए सवाल

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर एटक की प्रतिक्रिया, छात्र-युवा आंदोलन को बताया लोकतांत्रिक संघर्ष की उपलब्धि

रायपुर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ राज्य एटक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 35 दिनों से जारी छात्र-युवा आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के संदर्भ में छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। संगठन ने आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं और युवा साथियों को बधाई देते हुए उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त की है।

एटक ने जारी किया बयान
शनिवार को जारी बयान में छत्तीसगढ़ राज्य एटक के महासचिव हरि नाथ सिंह ने कहा कि यह सफलता केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करने, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और जनआंदोलनों की प्रभावशीलता को दर्शाने वाला घटनाक्रम है।

संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और संगठित जनसंघर्ष अपनी भूमिका निभाते हैं तथा जनता की आवाज़ को लंबे समय तक अनसुना नहीं किया जा सकता।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे उठाए
एटक ने अपने बयान में कहा कि देश के छात्र और युवा केवल शिक्षा के अधिकार की मांग तक सीमित नहीं हैं। संगठन के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा, सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं तथा सम्मानजनक और स्थायी रोजगार भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं।

बयान में कहा गया कि वर्तमान समय में देश का युवा बेरोजगारी, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, महंगी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और सीमित रोजगार अवसरों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एटक का मत है कि इन मुद्दों का समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
संगठन ने कहा कि जंतर-मंतर का आंदोलन इस बात का उदाहरण है कि जब छात्र और युवा संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करते हैं, तो उनकी आवाज़ को नज़र-अंदाज़ करना संभव नहीं होता।

एटक ने देशभर में चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों के प्रति अपनी एकजुटता दोहराते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष को और व्यापक बनाने का आह्वान किया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र-युवा आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर आगे क्या कदम उठाती है।

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