होमआसपास-प्रदेशधर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर्याप्त नहीं, शिक्षा संकट बरकरार: CPI जिला सचिव

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर्याप्त नहीं, शिक्षा संकट बरकरार: CPI जिला सचिव

कोरबा (पब्लिक फोरम)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के लंबे संघर्ष तथा व्यापक जनदबाव के बाद यह राजनीतिक निर्णय सामने आया है, जिसके लिए आंदोलन में शामिल सभी छात्रों और युवाओं को बधाई दी जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। उनके अनुसार विभिन्न छात्र संगठन, जिनमें AISF, AISA, SFI और NSUI शामिल हैं, शिक्षा संबंधी मुद्दों पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर सक्रिय आंदोलन करते दिखाई नहीं देते।

“सिर्फ मंत्री बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी”
पवन कुमार वर्मा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मूल प्रश्न समाप्त नहीं हो जाते। उनके अनुसार यह घटनाक्रम उन गहरी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिनका सामना देश की शिक्षा प्रणाली लंबे समय से कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा का तेजी से निजीकरण होने के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। साथ ही उन्होंने सरकारी स्कूलों के बंद होने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।

पेपर लीक और नई शिक्षा नीति पर भी उठाए सवाल
CPI जिला सचिव ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे छात्रों का भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर भी अपनी आपत्तियां व्यक्त कीं और आरोप लगाया कि इसके माध्यम से पाठ्यक्रमों में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं, जिन पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा और समीक्षा की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षा बजट में वृद्धि, रोजगारोन्मुख शिक्षा और व्यापक नीतिगत बदलाव आवश्यक हैं। यह उनके संगठन का राजनीतिक मत है।

##”आंदोलन स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं”
पवन कुमार वर्मा ने कहा कि यदि छात्र आंदोलन का औपचारिक समापन या स्थगन होता भी है, तब भी छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे समाप्त नहीं हुए हैं। उनके अनुसार पेपर लीक का प्रश्न व्यापक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का एक प्रतीक मात्र है।

उन्होंने दावा किया कि महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों और मजदूरों की समस्याएं, मनरेगा में कटौती, कृषि संकट, पुलिस कार्रवाई, बुलडोजर कार्रवाई तथा संविधान से जुड़े मुद्दे अब भी जनता के बीच मौजूद हैं। इसी कारण उन्होंने कहा कि जनआंदोलनों की आवश्यकता आगे भी बनी रहेगी।

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