कोरबा (पब्लिक फोरम)। कंपनियों के लिए केवल उत्पादन और मुनाफा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि सबसे नीचे काम करने वाले मजदूर भी कितने सुरक्षित हैं यह भी बहुत मायने रखता है। कोरबा स्थित भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड वेदांता समूह की प्रमुख औद्योगिक इकाई है जहां हजारों कर्मचारी प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।
यही वजह है कि हमे समझना होगा कि क्या सही में यहां forced labour के वैश्विक मानकों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा ? क्योंकि कुछ मामले सामने आये है जो गंभीर चिंतन का विषय है ।कुछ कर्मचारियों द्वारा हाल में यह आरोप लगाए गए हैं कि उनका गैरकानूनी स्थानांतरण (ट्रांसफर) किया गया, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न की गईं, जिनसे उनके लिए नौकरी करना तो दूर जीना मुश्किल हो गया है।

यहां मजदूरों, कर्मचारियों, अधिकारियों यहां तक श्रमिक संघों को समझना पड़ेगा आखिर Forced Labour (फोर्स्ड लेबर) और unfair lobour practice (अनफेयर लेबर प्रैक्टिस) क्या है ?
विशेषज्ञ बताते हैं कि फोरस्ड लेबर का मतलब है “जबरन मजदूरी”। बालको (वेदांता) जैसे बड़े औद्योगिक प्लांट में फोर्स्ड लेबर का अर्थ है—यदि किसी स्थायी, अस्थायी या ठेका श्रमिक से उसकी इच्छा के विरुद्ध, दबाव, डर, धमकी, वेतन रोकने,जबरन ट्रांसफर या किसी अन्य मजबूरी के माध्यम से काम कराया जाता है, तो वह जबरन श्रम की श्रेणी में आ सकता है।
एक स्वस्थ्य औद्योगिक व्यवस्था में मजदूरों को अधिकार होना चाहिए कि वह वेतन संबंधी शिकायत कर सके, सुरक्षा की कमी बता सके, प्रबंधन से सवाल कर सके, बिना डर भय या प्रतिशोध के शिकायत दर्ज कर सके।
वहीं unfair lobour practice (अनफेयर लेबर प्रैक्टिस) का मतलब बताया जाता है—श्रमिकों के साथ अनुचित व्यवहार, जैसे श्रम अधिकारों का उल्लंघन, भेदभाव, अनुचित दबाव, शिकायतों की अनदेखी, नियमों के विरुद्ध कार्य परिस्थितियां या श्रमिक हितों की अनदेखी।
दरअसल उद्योग को वैश्विक बाजार की कसौटी पर खरा उतरने के लिए निचले स्तर तक अपनी व्यवस्था ठीक करनी होगी। क्योंकि अब कर्मचारियों के ये मुद्दे ना सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डालेंगे लिहाजा यह मुद्दा वेदांता जैसी कंपनी के लिए चुनौती हो जाता है। क्योंकि बातया जाता है कुछ वर्षों से यहां का एचआर और आईआर विभाग अपने ज्ञान और हुनर के बजाए यूनियन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के कंधे पर चढ़ कर या यूं कहे सहारा ले कर काम कर रहा है।
कुल मिला कर कहना होगा हर कर्मचारी को अपने श्रम अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। यदि किसी कर्मचारी को लगता है कि उसके साथ अनुचित व्यवहार हो रहा है, तो उसे उपलब्ध शिकायत-निवारण तंत्र, श्रम विभाग, सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंचों का सहारा लेने का अधिकार है। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी भी है। इन दोनों विषयों में स्थायी, अस्थायी कर्मचारी और ठेका श्रमिक सभी शामिल हो सकते हैं।





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