बिलासपुर/सक्ती (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सामने आए एक बेहद दर्दनाक मामले ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और महिलाओं की असुरक्षा को उजागर कर दिया है। 25 वर्षीय एक युवती को प्रसव के महज दूसरे दिन उसके परिजनों ने नवजात शिशु समेत घर से बाहर निकाल दिया। बेबस युवती अपनी मासूम बच्ची को लेकर दो दिनों तक बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर भूखी-प्यासी पड़ी रही। मामले की जानकारी मिलने पर प्रवासी मजदूर संगठनों का संयुक्त मोर्चा (PMSSM) और सहयोगी संगठनों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पुलिस और सखी सेंटर की मदद से युवती को सुरक्षित आश्रय दिलाया।
यह घटना 13 मई 2026 को सामने आई, जब PMSSM के घटक संगठन छत्तीसगढ़िया बनिहार संघ के महासचिव रामेश्वर कुर्रे ने संगठन के संयोजक लखन सुबोध को फोन कर रेलवे स्टेशन पर बेसहारा पड़ी युवती की सूचना दी। इसके बाद संगठन ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए पूरी जानकारी जुटाई और सहायता के लिए टीम भेजी।
रेलवे स्टेशन पर मिली दर्दनाक हकीकत
संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता और उसके गांव का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। जानकारी मिलने के बाद लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) के महासचिव वीरेंद्र भारद्वाज को बिलासपुर रेलवे स्टेशन भेजा गया, जहां युवती से मुलाकात कर उसकी स्थिति जानी गई।
प्राथमिक बातचीत में जो जानकारी सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर दिया। युवती ने बताया कि उसका जीवन कई वर्षों से लगातार शोषण और प्रताड़ना का शिकार रहा है।

पहले पति की क्रूरता, फिर मायके का अस्वीकार
करीब 6-7 वर्ष पहले युवती की शादी उसके पिता ने एक ऐसे व्यक्ति से कर दी थी, जो शराब का आदी और चरित्रहीन था। इस विवाह से उसे दो बच्चे हुए। युवती के अनुसार, पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता था।
उसने आरोप लगाया कि पति ने कई बार उसके पैरों में बिजली का तार बांधकर करंट तक लगाया। गंभीर प्रताड़ना झेलने के बाद वह किसी तरह वहां से भागकर इलाज कराने में सफल हुई।
जब वह मदद की उम्मीद लेकर मायके पहुंची तो वहां भी उसे सहारा नहीं मिला। पिता ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। मजबूरी में उसे प्रवासी मजदूर बनकर गुजरात जाना पड़ा।
प्रेम विवाह का सपना भी टूटा
गुजरात में मजदूरी के दौरान उसकी मुलाकात एक नेपाली युवक से हुई। दोनों के बीच संबंध बने और युवती ने उससे प्रेम विवाह कर लिया। कुछ समय बाद जब वह गर्भवती हुई, तब युवक यह कहकर चला गया कि उसे अपने देश किसी जरूरी काम से जाना है।
इसके बाद वह कभी लौटकर नहीं आया।
युवती फिर हैदराबाद चली गई, जहां परिवार के परिचित प्रवासी मजदूरों ने उसे अस्थायी सहारा दिया। इसी बीच उसकी मां, जो बेटी की हालत से बेहद दुखी थीं, उसे वापस सक्ती बुला लाई।
गांव लौटने के 10-15 दिन बाद युवती ने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के दो-तीन दिन बाद ही परिवार में विवाद शुरू हो गया।
परिजनों ने नवजात के पिता को लेकर सवाल उठाए और ‘बदनामी’ का हवाला देते हुए युवती को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। आरोप है कि उसे यह कहकर निकाल दिया गया कि वह कहीं भी जाकर मर जाए, लेकिन घर वापस न आए।
शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से टूटी युवती किसी तरह बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां वह दो दिनों तक नवजात को लेकर पड़ी रही।

सामाजिक संगठनों ने बढ़ाया मदद का हाथ
मामले की सूचना मिलते ही PMSSM, लोक सिरजनहार यूनियन और गुरुघासीदास सेवादार संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस और सखी सेंटर से संपर्क कर युवती को वहां भर्ती कराया।
15 मई को लखन सुबोध और संगठन के कार्यालय सचिव अजय अनंत ने सखी सेंटर पहुंचकर युवती और शिशु के स्वास्थ्य की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
शोषण के हर आरोपी पर FIR की तैयारी
संगठनों का कहना है कि युवती जिस नेपाली युवक को अपना पति बता रही है, उसके खिलाफ भी धोखाधड़ी और शारीरिक शोषण की आशंका है। हालांकि फिलहाल युवती इस बात को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है।
संगठन के प्रतिनिधियों ने उसे समझाया है कि जिन-जिन लोगों ने उसके साथ अत्याचार किया है, उन सभी के खिलाफ FIR दर्ज कराई जानी चाहिए।
मानसिक रूप से अस्थिर और निराश्रित अवस्था में होने के बावजूद युवती ने कहा है कि यदि उसे सहयोग मिला तो वह रिपोर्ट दर्ज कराएगी।
समाज के सामने बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक युवती की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के उस कठोर चेहरे को उजागर करती है जहां एक महिला को उसके सबसे कमजोर क्षण – मातृत्व के तुरंत बाद- सहारे की बजाय तिरस्कार मिलता है।
एक नवजात को गोद में लिए रेलवे स्टेशन पर भूखी-प्यासी बैठी वह मां सिर्फ मदद की प्रतीक्षा नहीं कर रही थी, बल्कि समाज से यह सवाल भी पूछ रही थी कि आखिर एक महिला की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी किसकी है?
PMSSM और उसके सहयोगी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कानूनी और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराएंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और कानून व्यवस्था इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाती है।





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