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कोरबा: 14 वर्षीय लापता बेटी को खोजने में पुलिस नाकाम, हताश पिता ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक 14 वर्षीय नाबालिग के पिछले ढाई महीने से लापता होने के मामले में पीड़ित पिता ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे पिता ने कोरबा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को आवेदन सौंपकर न्याय और बेटी की सुरक्षित बरामदगी की गुहार लगाई है।
मुख्य बिंदु:
🔹 घटना: 14 वर्षीय नाबालिग बेटी की गुमशुदगी।
🔹प्राथमिकी (FIR): 16 जुलाई 2026 को कोतवाली थाना कोरबा में दर्ज (अपराध क्रमांक 628/2026)।
🔹आरोप: पुलिस द्वारा संतोषजनक कार्रवाई न करना और भ्रामक जानकारी देना।
🔹संदेह: परिवार ने एक स्थानीय युवक पर आरोप लगाया है, लेकिन एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज है।

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क्या है पूरा मामला?
परिजनों के अनुसार, उनकी 14 वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने पहले अपने स्तर पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने 16 जुलाई 2026 को कोरबा के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 628/2026 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में सीतामणी के बसोड़ मोहल्ला निवासी ओमप्रकाश बसोड़ पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, पिता का दावा है कि उनकी स्पष्ट शिकायत के बावजूद पुलिस ने ‘अज्ञात व्यक्ति’ के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस की कार्यशैली पर पिता के आरोप
एसपी को दिए गए आवेदन में पिता ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज होने के ढाई महीने बाद भी पुलिस उनकी बेटी का पता लगाने में नाकाम रही है। पिता का कहना है कि जब भी वह जानकारी लेने कोतवाली थाना जाते हैं, तो उन्हें कभी हरिद्वार तो कभी किसी अन्य जगह का नाम बताकर वापस भेज दिया जाता है।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस उन्हें केवल घुमा रही है, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। थाने के चक्कर काटने में उनका काफी खर्च हो चुका है, लेकिन बेटी अब तक घर नहीं लौटी है।

पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले और परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों पर फिलहाल कोरबा पुलिस या कोतवाली थाना प्रभारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आरोपी के रूप में जिस व्यक्ति का नाम परिवार ले रहा है, उसकी भूमिका की भी आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने अभी तक नहीं की है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
नाबालिगों की गुमशुदगी के मामले कानूनी और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होते हैं। कानून के मुताबिक, ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। समय बीतने के साथ लापता बच्चों के मानव तस्करी, शोषण या बाल मजदूरी का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। एक सामान्य नागरिक और पीड़ित परिवार के लिए न्याय प्रणाली और प्रशासन पर भरोसा बनाए रखने के लिए पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।

हताश पिता ने अब पुलिस अधीक्षक से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। परिवार की मांग है कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए संदिग्ध आरोपी के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करे और नाबालिग को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद करे। अब इस मामले की आगे की दिशा एसपी द्वारा कोतवाली पुलिस को दिए जाने वाले निर्देशों और पुलिस की आगामी जांच पर निर्भर करेगी।
(नोट: कानून के अनुसार, पहचान उजागर न हो, इसलिए लापता नाबालिग का नाम, तस्वीर और अन्य व्यक्तिगत विवरण प्रकाशित नहीं किए गए हैं।)

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