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दिल्ली-नोएडा रूट की बस में नाबालिग से गैंगरेप: ऐपवा समेत कई महिला संगठनों का जंतर मंतर पर प्रदर्शन

गृहमंत्री को सौंपा सुरक्षा से जुड़ा ज्ञापन
निजी बसों में सुरक्षा खामियां उजागर, निर्भया कांड की याद ताज़ा

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नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। नोएडा मार्ग पर चलने वाली एक निजी बस में एक 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की घटना के विरोध में गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेंस एसोसिएशन (ऐपवा) समेत कई महिला संगठनों ने संयुक्त प्रदर्शन किया। संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर यात्री सुरक्षा और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग उठाई।
संगठनों के अनुसार, पीड़िता नोएडा से दिल्ली की ओर जा रही एक निजी बस में यात्रा कर रही थी, तभी बस में ही यह घटना हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने के कारण अंदर की गतिविधि बाहर से नहीं दिखाई दे रही थी। महिला संगठनों ने सवाल उठाया कि यातायात नियमों का उल्लंघन कर चल रही ऐसी बसों की नियमित जांच क्यों नहीं होती।

संगठनों ने इस घटना की तुलना 16 दिसंबर 2012 के निर्भया गैंगरेप कांड से की, जिसके बाद देशभर में सार्वजनिक परिवहन में महिला सुरक्षा को लेकर कई नियम बनाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर की परिवहन व्यवस्था में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर खामियां बनी हुई हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि करीब छह महीने पहले भी एक महिला के साथ बस में इसी तरह की घटना हुई थी, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यौन अपराधों के दोषियों के प्रति नरमी बरते जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई और मांग की कि पीड़िता को त्वरित न्याय, चिकित्सा सहायता और मनोवैज्ञानिक सहयोग मिले। उन्होंने बिलकिस बानो और उन्नाव जैसे बहुचर्चित मामलों का हवाला देते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की अपील की।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं:
दिल्ली और आसपास के राज्यों में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
यौन अपराधों में लिप्त पाए गए निजी परिवहन ऑपरेटरों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं।
सभी सार्वजनिक वाहनों में लाइव जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग, पैनिक बटन और सीसीटीवी (CCTV) अनिवार्य किए जाएं।
दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक अदालतों में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
यात्री सुरक्षा को लेकर सभी परिवहन ऑपरेटरों (सरकारी और निजी) के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया – एसओपी (SOP) जारी की जाए।


पीड़िता को चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक सहयोग, कानूनी मदद और पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित की जाए, तथा निर्भया फंड से सहायता दी जाए।

यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाली लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। रोज़ाना निजी बसों से स्कूल-कॉलेज या काम पर जाने वाली बेटियों के परिजनों के लिए यह चिंता की एक और वजह बन गई है। संगठनों की मांग है कि प्रशासन ठोस कदम उठाकर यात्रियों में भरोसा बहाल करे।

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