“बेमेतरा CMHO पर महिला उत्पीड़न के आरोप, सैकड़ों कर्मचारियों का प्रदर्शन”
रायगढ़ (पब्लिक फोरम)। बेमेतरा जिले में पदस्थ महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के साथ कथित दुर्व्यवहार और मानसिक-आर्थिक उत्पीड़न के आरोपों पर अपेक्षित कार्रवाई न होने से नाराज़ छत्तीसगढ़ प्रदेश एन.एच.एम. कर्मचारी संघ की रायगढ़ इकाई ने 18 अगस्त को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर विरोध जताया। तेज बारिश के बावजूद सैकड़ों कर्मचारी सड़क पर उतरे और कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने आरोपी अधिकारी को तत्काल पद से हटाने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
बारिश में भी नहीं थमी रैली
छत्तीसगढ़ प्रदेश एन.एच.एम. कर्मचारी संघ की जिला इकाई रायगढ़ के आह्वान पर जिले भर के एन.एच.एम. और सीएचओ संवर्ग के कर्मचारी सुबह शहीद कर्नल बिप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में जमा हुए। मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के बावजूद कर्मचारियों का उत्साह कम नहीं पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे यहां से एक अनुशासित पैदल रैली निकाली गई, जो शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची।
कलेक्ट्रेट में सभा और मीडिया से बातचीत के बाद संघ ने माननीय स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर रायगढ़ के माध्यम से संयुक्त कलेक्टर धनराज मरकाम को सौंपा।
संघ के जिला पदाधिकारियों के अनुसार यह विरोध बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के विरुद्ध दर्ज शिकायतों को लेकर है। पदाधिकारियों ने बताया कि शासकीय समीक्षा बैठकों के दौरान महिला कर्मचारियों के संदर्भ में और देश के माननीय प्रधानमंत्री के नाम का अनुचित उल्लेख करते हुए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया। यह भी आरोप है कि लेजर लाइट डालकर महिला कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से असहज किया गया और अवांछित शारीरिक स्पर्श तथा अशोभनीय भाषा के जरिए प्रताड़ित किया गया। इनके साथ ही वेतन रोकने, सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज कराने जैसी प्रशासनिक धमकियां देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
यह आरोप फिलहाल संघ के पदाधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं; प्रशासन या संबंधित अधिकारी की ओर से इन पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पदाधिकारियों का बयान
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी, जिला अध्यक्ष शकुंतला एक्का और सीएचओ संघ के जिलाध्यक्ष संदीप मिंज ने संयुक्त रूप से कहा कि शासकीय कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि भयमुक्त और गरिमामय जीवन हर कर्मचारी का मौलिक अधिकार है। पदाधिकारियों ने मांग की कि जब तक इस मामले की उच्च स्तरीय जांच पूरी नहीं हो जाती, निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेमेतरा सीएमएचओ को तत्काल पद से हटाया जाए या अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
संघ की प्रमुख मांगें
🔹बैठकों में प्रधानमंत्री के संदर्भ में की गई कथित अभद्र टिप्पणी और महिला उत्पीड़न के सभी आरोपों की उच्च स्तरीय व स्वतंत्र जांच हो।
🔹महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की जांच POSH अधिनियम, 2013 और विशाखा गाइडलाइंस के प्रावधानों के तहत की जाए।
🔹जांच निष्पक्ष रहे, इसके लिए बेमेतरा सीएमएचओ को तत्काल वर्तमान पद से हटाया जाए।
🔹नियमविरुद्ध रोके गए वेतन और इंसेंटिव (PLP) का शीघ्र भुगतान हो।
🔹कर्मचारियों से केवल निर्धारित TOR (Terms of Reference) के अनुरूप ही कार्य लिया जाए।
🔹दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कठोर दंडात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाए।
संघ की मांगों पर प्रशासनिक स्तर पर क्या रुख अपनाया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला स्वास्थ्य विभाग में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा संबंधी नीतियों और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। दूसरी ओर, कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन और इंसेंटिव जल्द जारी न होने की स्थिति में विरोध और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह प्रदर्शन केवल एक जिले या एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि सरकारी कार्यस्थलों पर महिला कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा तंत्र कितना प्रभावी है। तेज बारिश में भी सड़क पर उतरे कर्मचारियों का हौसला बताता है कि यह मुद्दा उनके लिए रोज़मर्रा की शिकायत नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस ज्ञापन पर कितनी संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करता है।





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