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बालकोनगर: वेदांता प्रबंधन के द्वारा अंबेडकर भवन का नाम बदलने पर बवाल: कांग्रेस, महिला समिति, सामाजिक संगठनों का विरोध

वेदांता प्रबंधन पर अंबेडकर भवन का नाम मिटाकर “वेदांता स्किल स्कूल” किए जाने का आरोप, अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। पाड़ीमार, बालको टाउनशिप स्थित सेक्टर 5 में स्थित ‘अंबेडकर भवन (कम्युनिटी सेंटर)’ का नाम बालको वेदांता प्रबंधन द्वारा बदलकर ‘वेदांता स्किल स्कूल’ किए जाने से कोरबा जिले में तीखा विरोध भड़क उठा। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और ‘हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति’ ने कलेक्टर को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर भवन का पुराना नाम तत्काल बहाल करने और प्रबंधन से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।

कांग्रेस ने दर्ज कराई आपत्ति
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बालको के अध्यक्ष ए.डी. जोशी की ओर से कलेक्टर, कोरबा को सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि पहले से संचालित ‘अंबेडकर भवन’ का नाम बदलकर ‘वेदांता स्किल स्कूल’ कर दिया गया है। आवेदन में इस पर आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन से मामले की जांच कराने और बालको प्रबंधन को भवन का नाम पुनः ‘बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन’ किए जाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
आवेदन में कहा गया है कि डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक भी थे, इसलिए उनके नाम पर स्थापित भवन का नाम बदलना स्थानीय नागरिकों और उनके अनुयायियों की भावनाओं से सीधे जुड़ा विषय है। आवेदन में लिखा गया है-
“हमें विश्वास है कि जिला प्रशासन इस जनभावना एवं सामाजिक समाज से जुड़े विषय पर उचित निर्णय लेकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम की पुनः स्थापना सुनिश्चित करेगा।”
आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, कोरबा तथा थाना प्रभारी, बालको को भी भेजी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस ने मामले को केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित न रखते हुए कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया है। हालांकि आवेदन में यह उल्लेख नहीं है कि नाम बदलने का निर्णय कब लिया गया और इसके लिए बालको प्रबंधन ने कौन-सी आधिकारिक प्रक्रिया अपनाई।

महिला शक्ति समिति ने चेताया – ‘यह संविधान निर्माता का अपमान’
‘हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति’ ने भी कलेक्ट्रेट पहुँचकर जन दर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन की केंद्रीय अध्यक्ष लक्ष्मीन दीदी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में भवन का नाम बदले जाने को संविधान निर्माता का अपमान करार दिया गया और कहा गया कि कंपनी का यह कृत्य बर्दाश्त से बाहर है।
ज्ञापन के अनुसार बालकोनगर के रहवासी, स्थानीय ट्रेड यूनियनें, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) व अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की संस्थाएं और विभिन्न राजनीतिक दल इस फैसले से आहत महसूस कर रहे हैं। संगठन ने बालको प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
🔹सार्वजनिक माफी – बालको वेदांता प्रबंधन अविलंब क्षेत्र की जनता से माफी मांगे।
🔹यथावत नामकरण – भवन का नाम पुनः संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर तत्काल बहाल किया जाए।
🔹कानूनी कार्रवाई – मांग पूरी न होने पर सभी संगठन मिलकर बालको वेदांता के खिलाफ विधिक कार्रवाई करेंगे।
🔹अनिश्चितकालीन धरना – पहले शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जाएगा।

पृष्ठभूमि: कॉर्पोरेट जवाबदेही पर सवाल

इस मुद्दे पर तीखा प्रहार करते हुए आदिनिवासी गण परिषद के संयोजक बीएल नेताम ने एक ऐसी सच्चाई से पर्दा उठाया, जो वेदांता जैसी कंपनियों के असली चेहरे को बेनकाब करती है – बालको टाउनशिप के सेक्टर 2 स्थित शहीद वीर नारायण सिंह मंगल भवन का नाम भी चुपके से मिटा दिया गया, मानो एक शहीद की कुर्बानी कोई मायने ही न रखती हो। इस कुत्सित हरकत ने स्थानीय समुदाय के अंदर सुलगते आक्रोश को भड़का दिया। अंततः जनाक्रोश के डर से, न कि किसी सम्मान या नैतिकता के चलते, शहीद वीर नारायण सिंह का नाम किसी तरह टिका तो रह गया – लेकिन किस औकात में? इतने बौने, इतने दबे-कुचले अक्षरों में, कि वेदांता के भारी-भरकम, चमकते हुए ब्रांड-नाम के सामने वह नाम बौना और लाचार नजर आता है। एक ऐसा शहीद, जिसने आदिवासी अस्मिता और अपनी माटी की रक्षा के लिए अपना खून बहाया, आज कॉर्पोरेट अहंकार के तले कुचला जा रहा है – यह न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि एक सुनियोजित सांस्कृतिक अपराध है।

साफ शब्दों में कहें तो, यह विवाद किसी नामपट्ट (नेमप्लेट) बदलने भर की मामूली बात नहीं है – यह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के मुखौटे के पीछे छिपा वह घिनौना खेल है, जिसमें आदिनिवासी समुदायों की सामाजिक-सांस्कृतिक धरोहरों को व्यवस्थित ढंग से मिटाया जा रहा है। यह सिर्फ एक इमारत के नाम का सवाल नहीं, बल्कि यह सवाल है कि क्या मुनाफाखोर कॉर्पोरेट ताकतें अब हमारे शहीदों की स्मृति, हमारी पहचान और हमारे इतिहास तक को निगल जाने पर आमादा हैं। यह चुप्पी तोड़ने और जवाबदेही मांगने का वक्त है, न कि सहने का।

बालको क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत रहे कई पूर्व कर्मचारियों और रहवासियों के लिए सेक्टर 5 स्थित यह भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता रहा है।
प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेज वेदांता प्रबंधन पर नाम बदलने का आरोप है, लेकिन वेदांता प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। यह मामला इस व्यापक सवाल से भी जुड़ता है कि सार्वजनिक महत्व वाले सामुदायिक स्थलों के नामकरण और नाम-परिवर्तन में स्थानीय समाज की भावनाओं, ऐतिहासिक संदर्भ और पारदर्शिता को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।

यदि जिला प्रशासन ने समय रहते इस संवेदनशील मुद्दे पर संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं की, तो कोरबा जिले का यह औद्योगिक क्षेत्र एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। बालकोनगर के हजारों निवासियों, श्रमिकों और वंचित वर्गों के लिए यह लड़ाई केवल एक नामपट्ट की नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक पहचान और सम्मान की है – और इसका फैसला आने वाले दिनों में प्रशासन व वेदांता प्रबंधन के रुख पर निर्भर करेगा।

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