उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक संपन्न
रायपुर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code, UCC) लागू करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय में राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक हुई। लगभग दो घंटे चली इस बैठक में समिति के सदस्यों ने UCC की अवधारणा, उसके कानूनी पहलुओं, कार्यप्रणाली तथा आगे की कार्ययोजना पर प्रारंभिक चर्चा की। सरकार का उद्देश्य राज्य की सामाजिक एवं कानूनी परिस्थितियों के अनुरूप संभावित प्रारूप तैयार करना बताया जा रहा है।
समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) डॉ. रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुईं। बैठक में उत्तराखंड के पूर्व आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, सदस्य एम.के. राउत, अधिवक्ता मोहन पवार तथा सदस्य ज्योति रानी सिंह भी उपस्थित रहे। इसे परिचयात्मक बैठक माना जा रहा है, जिसमें सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए और आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समिति विभिन्न पक्षों से सुझाव एकत्र करेगी। इसके लिए सामाजिक संगठनों, महिला समूहों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, धार्मिक प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों से भी राय ली जा सकती है। इन सुझावों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code–UCC) ऐसा नागरिक कानून है, जिसके लागू होने पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे, चाहे उनका धर्म, जाति या समुदाय कोई भी हो।
वर्तमान में भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) लागू हैं। UCC का उद्देश्य इन मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। हालांकि यह केवल नागरिक मामलों से संबंधित अवधारणा है और इसका आपराधिक कानून से कोई संबंध नहीं है।
संविधान से जुड़ी है अवधारणा
समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में किया गया है। यह संविधान के राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है। इसमें राज्य से अपेक्षा की गई है कि वह देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे। हालांकि यह प्रावधान न्यायालय द्वारा बाध्यकारी नहीं है, लेकिन संविधान निर्माताओं ने इसे भविष्य की नीति के रूप में देखा था।
उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ की तैयारी
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में भी इस दिशा में पहल की जा रही है। अब छत्तीसगढ़ ने भी औपचारिक रूप से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
यदि समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और उसके आधार पर राज्य सरकार विधानसभा में विधेयक लाकर उसे पारित करा लेती है, तो छत्तीसगढ़ UCC लागू करने वाला देश का पाँचवाँ राज्य बन सकता है।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से नागरिक कानूनों में एकरूपता आएगी, अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से उत्पन्न होने वाले भ्रम कम होंगे तथा न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। सरकार का यह भी कहना है कि इससे महिलाओं सहित सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण और अधिकार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी तथा पारिवारिक विवादों के समाधान की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय
समान नागरिक संहिता लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का विषय रही है। इसके समर्थकों का कहना है कि यह सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
वहीं, छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठन आशंका व्यक्त करते हैं कि इससे विभिन्न समुदायों की परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों पर प्रभाव पड़ सकता है। कई विधि विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे व्यापक कानून पर निर्णय लेने से पहले सभी प्रभावित पक्षों के साथ विस्तृत संवाद और सार्वजनिक परामर्श आवश्यक है, ताकि कानून अधिक संतुलित और स्वीकार्य बन सके।
समिति अब विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त करेगी, कानूनी अध्ययन करेगी और छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का परीक्षण करेगी और यदि आवश्यक समझेगी तो विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून के रूप में लागू किया जा सकेगा।
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर समिति की पहली बैठक इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है। हालांकि अभी कानून बनने की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है, लेकिन आने वाले समय में व्यापक जनपरामर्श, कानूनी समीक्षा और राजनीतिक विमर्श इसकी दिशा तय करेंगे। इसका प्रभाव राज्य के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर परिवार, महिलाओं और उत्तराधिकार जैसे नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। इसलिए इस विषय पर व्यापक भागीदारी और संतुलित चर्चा महत्वपूर्ण होगी।





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