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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन: AISA के 6 छात्र नेता भी कूदे समर्थन में

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEP रद्द करने की मांग पर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल तेज

नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को वापस लेने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन और तेज हो गया है। सात दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद 28 जून को दोपहर 2 बजे जाने-माने पर्यावरण व शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने यहाँ आमरण अनशन शुरू किया। इसी के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के 6 छात्र नेता भी उनके समर्थन में आमरण अनशन पर बैठ गए, जिससे आंदोलन को राष्ट्रव्यापी ध्यान मिलने की संभावना और बढ़ गई है।

सात दिनों के संघर्ष के बाद अनशन का ऐलान
जंतर-मंतर पर सात दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के बाद सोनम वांगचुक ने शनिवार 28 जून की दोपहर से भूख हड़ताल शुरू की। वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, यह अनशन जारी रहेगा। उनकी मुख्य माँगें हैं – NTA को तत्काल भंग किया जाए और NEP 2020 को पूरी तरह वापस लिया जाए।
कौन हैं अनशन पर बैठे 6 छात्र नेता?
AISA ने इस संघर्ष में पूरी एकजुटता दिखाते हुए अपने 6 प्रमुख नेताओं को आमरण अनशन पर भेजा है। इनमें शामिल हैं:
नेहा – AISA की अखिल भारतीय अध्यक्ष
दानिश – JNUSU के संयुक्त सचिव
मनीष – AISA के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष
दीपक – AISA, दिल्ली विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष
हृषिकेश – JNU के बराक हॉस्टल के अध्यक्ष
आमीन – AUD छात्र परिषद के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य
पृष्ठभूमि: क्यों उठी NTA और NEP के खिलाफ आवाज?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रही है। NEET-UG और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक, अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोपों ने लाखों छात्रों का भविष्य अधर में डाल दिया है। दूसरी ओर, NEP 2020 को लेकर शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि यह नीति शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देती है और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

AISA का बयान – कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे
AISA ने अपने बयान में कहा है कि छात्र नेता सोनम वांगचुक की पुकार के साथ पूरी एकजुटता में यह अनशन कर रहे हैं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, NTA भंग नहीं होती और NEP 2020 वापस नहीं ली जाती – यह संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलन का असर और आगे की राह
जंतर-मंतर – जो ऐतिहासिक रूप से देश के बड़े जन-आंदोलनों का केंद्र रहा है – एक बार फिर शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर प्रतिरोध की धुरी बन गया है। सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय छवि और AISA जैसे संगठनों की उपस्थिति से यह आंदोलन राजनीतिक दलों और सरकार पर दबाव बनाने में सक्षम हो सकता है। अब देखना यह है कि सरकार कब और किस रूप में इस पर प्रतिक्रिया देती है।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की माँग अब सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रही – वह आमरण अनशन तक पहुँच गई है। सोनम वांगचुक और 6 छात्र नेताओं का यह कदम सरकार को एक स्पष्ट संदेश देता है: जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, आवाजें शांत नहीं होंगी। यह प्रश्न केवल परीक्षा प्रणाली का नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के भविष्य का है जिन्होंने सपने देखे और जिनके सपने एक दोषपूर्ण तंत्र की भेंट चढ़ गए।





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