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जिन हाथों ने कंपनी को सींचा, आज वे खाली: अपने ही हक के लिए भटक रहे बालको-वेदांता के बुजुर्ग कर्मचारी; कोरबा कलेक्टर जनदर्शन में लगाई न्याय की गुहार

कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिन हाथों ने दशकों तक भट्ठियां जलाईं, एल्युमिनियम ढाला और देश के औद्योगिक गौरव को खड़ा किया – वही हाथ आज अपने बुनियादी हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। BALCO के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सोमवार को कोरबा कलेक्टर जनदर्शन कार्यक्रम में एक औपचारिक आवेदन (टोकन क्रमांक: 2050126001471) प्रस्तुत कर जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई। बालको सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन (संबद्ध: ऐक्टू) के बैनर तले संयोजक बी.एल. नेताम, अल्युमिनियम कामगार संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष रामजी शर्मा, सचिव आर.के. महंत व रूपदास के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने चार प्रमुख मांगों पर तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की।

वे लड़ रहे हैं – अपने ही हक के लिए
कोरबा का बालकोनगर, जो कभी मजदूरों की ऊर्जा और उत्साह से गुलज़ार रहता था, आज उन्हीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पीड़ा का गवाह बन रहा है। वेदांता प्रबंधन के अधीन आने के बाद से बालको के पूर्व कर्मचारियों को उनके विधिक और नैसर्गिक अधिकारों से व्यवस्थित तरीके से वंचित किया जा रहा है – ऐसा संगठन का स्पष्ट आरोप है।

चार प्रमुख मांगें – जो वर्षों से लंबित हैं

🔸1. सेवाकाल विस्तार का बकाया भुगतान:
अगस्त 2019 में लागू हुए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई थी। उन अतिरिक्त दो वर्षों का वेतन, मुआवजा और अन्य देय राशियाँ आज तक नहीं चुकाई गई हैं। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला अंतिम भुगतान (Final Settlement) भी प्रबंधन ने अवैध रूप से रोक रखा है। संगठन ने माँग की है कि यह राशि ब्याज सहित तत्काल जारी की जाए।

🔸2. चिकित्सा सुविधाओं की बहाली:
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमानुसार मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रबंधन ने मनमाने ढंग से बंद कर दी हैं। बुजुर्ग और बीमार कर्मचारी, जिनकी उम्र अब इलाज की सबसे ज़्यादा ज़रूरत वाली है, दवाओं और अस्पताल के खर्च के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने इसे “अमानवीय कृत्य” करार देते हुए तत्काल बहाली की माँग रखी है।

🔸3. आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति और रोजगार:
अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवार आर्थिक संकट में जी रहे हैं। पूर्व में लागू नीतियों के तहत उनके आश्रितों को योग्यतानुसार कंपनी में प्राथमिकता पर रोजगार या अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का प्रावधान था। संगठन ने माँग की है कि इसे पुनः लागू कर परिवारों को जीविका का ज़रिया दिया जाए।

🔸4. बालकोनगर व्यापारिक परिसर में दुकान आवंटन:
बालको नगर के व्यापारिक परिसर में प्रबंधन ने सामान्य व्यापारियों को सर्व सुविधा युक्त दुकानें आवंटित की हैं, जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बेरोजगार आश्रित खाली हाथ खड़े हैं। संगठन ने समानता के सिद्धांत और पुनर्वास नीति के तहत इन आश्रितों को भी दुकानें आवंटित करने की माँग की है, ताकि वे स्वाभिमान से स्वरोजगार कर सकें।

कलेक्टर से मांग – वेदांता प्रबंधन को तलब करें

संगठन के संयोजक बी.एल. नेताम और सचिव आर.के. महंत ने कलेक्टर से माँग की है कि वे बालको के वेदांता प्रबंधन को तलब करें और उन्हें समयबद्ध तरीके से इन मांगों का निराकरण करने के निर्देश दें। आवेदन में स्पष्ट कहा गया है –
“यदि आपके स्तर से उचित और ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह न्याय की जीत होगी।”

प्रतिनिधिमंडल में एल.एन.नाई, पुरुषोत्तम कश्यप, रमेश पटेल, निर्मल कुमार कसार, रूपदास, अनिल पटेल, रामजी शर्मा, विष्णु प्रसाद कनाठे, कौशल प्रसाद, बी.आर.चौहान सहित कई सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

अब आगे क्या?
यह पहला मौका नहीं है जब बालको सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी माँगें उठाई हों। संगठन पहले भी त्रिपक्षीय बैठकों और NHRC तक जा चुका है। अब कलेक्टर जनदर्शन के माध्यम से प्रशासन का दरवाज़ा खटखटाया गया है। देखना यह होगा कि ज़िला प्रशासन इन माँगों पर कितनी तेज़ी और गंभीरता से कदम उठाता है।

जिन कर्मचारियों ने जवानी में कारखाने को अपना घर समझकर काम किया, वे बुढ़ापे में सिर्फ़ यही चाहते हैं – थोड़ा सम्मान, थोड़ा इलाज, और अपने बच्चों के लिए रोजी-रोटी का इंतज़ाम। यह कोई भीख नहीं, यह उनका हक़ है।

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