बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। बालको वेदांता संयंत्र में एक बार फिर औद्योगिक हादसे ने दस्तक दी है। टाउनशिप विभाग में कार्यरत श्रमिक गणेश राम रविवार को उस वक्त गंभीर रूप से घायल हो गए, जब काम के दौरान ग्राइंडर मशीन ने उनके हाथ की तीन उंगलियाँ काट दीं। मिली जानकारी के अनुसार उनसे कार्यस्थल में बिना सुरक्षा दस्ताने (Safety gloves) के ही काम करवाया जा रहा था। वैसे, ऐसी लापरवाहियां अक्सर कंपनी के सुपरवाइजरों, ठेकेदारों तथा सुरक्षा विभाग के द्वारा की ही जाती हैं। इतना ही नहीं, घटना के बाद उन्हें कंपनी के द्वारा एंबुलेंस सुविधा तक मुहैय्या नहीं कराई गई। बल्कि एक बाइक सवार से लिफ्ट लेकर वह घायल श्रमिक भयंकर पीड़ा से कराहता हुआ, किसी तरह बालको अस्पताल पहुंचा। घायल श्रमिक का बालको हॉस्पिटल में फिलहाल उपचार जारी है।

गणेश राम के घर में जब यह खबर पहुँची, तो पूरा परिवार सदमे में आ गया। उनके बच्चों की आँखों में आँसू और पत्नी के चेहरे पर चिंता की लकीरें – यह मंजर एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक मजदूर अपनी रोजी-रोटी के लिए अपना लहू बहाते रहेंगे? क्या कारखानों के कार्य स्थल और कामगारों की जिन्दगी कभी सुरक्षित नहीं हो सकतीं? आखिरकार, कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी?
बार-बार हो रहे हादसे, पर नहीं ली जा रही सीख
यह कोई पहली घटना नहीं है। बालको वेदांता संयंत्र में पिछले कुछ समय से औद्योगिक दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बावजूद इसके, न तो कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और न ही संबंधित सरकारी विभागों की नींद खुल रही है।
– हर हादसे के बाद बयानबाजी होती है।
– जाँच की बात होती है।
– फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
– और अगली दुर्घटना का इंतजार होता रहता है।





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