भीषण गर्मी ने आंदोलन को रोका, लेकिन न्याय की आग को नहीं – शांति नगर संघर्ष समिति ने जताया आभार, किया संघर्ष जारी रखने का ऐलान
कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। जब इरादा पक्का हो और अन्याय असहनीय, तो गर्मी भी आंदोलन की आत्मा को नहीं जला सकती। बालको नगर के शांति नगर की गलियों से उठी न्याय की यह आवाज़ 75 दिनों तक अनवरत गूंजती रही – और अब जब मौसम की मार ने इस संघर्ष को एक पल की सांस लेने पर मजबूर किया है, तब भी शांति नगर संघर्ष समिति का स्वर उतना ही दृढ़ है।
16 फरवरी 2026 को जब इस आंदोलन की पहली चिंगारी जली थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह शांतिपूर्ण संघर्ष 75 दिनों की लंबी और थकाऊ यात्रा तय करेगा। लेकिन 1 मई 2026 – मजदूर दिवस – को इस संघर्ष ने अपनी 75वीं सुबह देखी। यह तारीख महज संयोग नहीं, बल्कि एक प्रतीक है – उन तमाम लोगों के हक की लड़ाई का, जो अपनी ज़मीन, अपने घर और अपने अधिकारों के लिए डटे रहे।
जन-एकजुटता बनी ढाल
समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संघर्ष में उनकी सबसे बड़ी ताकत न कोई नेता था, न कोई संगठन – बल्कि वह हर साथी, हर सामाजिक कार्यकर्ता, हर मीडियाकर्मी और हर जनप्रतिनिधि था, जिसने इस आंदोलन को अपना माना। समिति ने सभी का हृदय से आभार जताते हुए कहा – “आपके विश्वास और एकजुटता ने हमें यह भरोसा दिया कि न्याय की लड़ाई में हम अकेले नहीं हैं।”
गर्मी ने रोका, हार नहीं मानी
प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। यह विराम थकान का नहीं, विवेक का प्रतीक है। समिति ने साफ कर दिया कि यह स्थगन समर्पण नहीं है – “संघर्ष जारी है। आंदोलन की आग बुझी नहीं है, बस एक पल के लिए सुरक्षित की गई है।”

शांति नगर संघर्ष समिति ने सभी समर्थकों से अपील की है कि भविष्य में भी वे इसी एकजुटता के साथ खड़े रहें। यह लड़ाई अधिकारों की है, न्याय की है – और ऐसी लड़ाइयाँ न मौसम से डरती हैं, न समय से।
“शांति नगर, बालको नगर, कोरबा के समस्त प्रभावित निवासियों की यह आवाज़ गूंजती रहेगी – तब तक, जब तक न्याय नहीं मिल जाता।”





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