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कोरबा में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, कांग्रेस नेताओं ने कहा- ‘भारतीय चेतना के जनक’

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिला कांग्रेस कार्यालय में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व और देशभक्ति के योगदान को याद किया। नेताओं ने तिलक को “भारतीय चेतना का जनक” और “महात्मा गांधी के अग्रदूत” बताते हुए उनके उग्र विचारों और राष्ट्रप्रेम को आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत करार दिया।

कोरबा के टी. पी. नगर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान विचारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर एक स्मरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लोकमान्य तिलक के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इस दौरान उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा- ‘तिलक में था अभिमन्यु जैसा साहस’
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान ने इस मौके पर कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक में महाभारत के अभिमन्यु की तरह अपार साहस और अद्वितीय प्रतिमा थी। उन्होंने कहा कि तिलक अपनी निःस्वार्थ देशभक्ति और अदम्य साहस के कारण स्वतंत्र भारत के महान निर्माताओं में से एक हैं।

श्री चौहान ने आगे बताया कि गंगाधर तिलक ने देशप्रेम की ज्योति को सदा प्रकाशमान रखने के लिए अपने उग्र विचारों को ध्वनि तरंगों की तरह देश के कोने-कोने में फैलाने का कार्य किया। युवाओं में उत्साह और साहस जागृत करने के लिए उन्होंने गणपति उत्सव की शुरुआत की और 1895 में शिवाजी उत्सव का आयोजन किया, जिसके बहुत सकारात्मक परिणाम निकले।

पार्षद रवि चंदेल ने कहा- ‘तिलक हैं भारतीय चेतना के जनक’
पार्षद रवि चंदेल ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारतीय चेतना का जनक माना जाता है। उन्होंने कहा कि तिलक महात्मा गांधी के अग्रदूत थे और उनका जीवन दिव्य था। इसी कारण देशवासियों ने उन्हें ‘लोकमान्य’ की उपाधि दी और तिलक को भगवान के सम्मान में भी याद किया।

इस अवसर पर पार्षद सुकसागर निर्मलकर, पूर्व पार्षद रामगोपाल यादव, हरविंदर सिंह, रज्जाक खान और भुवनपाल ने भी तिलक के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके जीवन संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला। सभी नेताओं ने तिलक के विचारों को आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक बताया।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का योगदान
बाल गंगाधर तिलक (1856-1920) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया, जो स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणा स्त्रोत बना। उन्होंने गणेशोत्सव और शिवाजी उत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। उनके विचारों का प्रभाव न केवल उनके समय में बल्कि आज भी कायम है।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा उनके विचारों और राष्ट्रभक्ति की प्रासंगिकता को रेखांकित करने का प्रयास था। जब देश आजादी के अमृत महोत्सव के पड़ाव से गुजर रहा है, ऐसे वीरों की स्मृति न केवल गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को संकल्पित करती है कि साहस, विचार और त्याग के इस रास्ते पर चलना ही राष्ट्र की वास्तविक सेवा है। तिलक के उग्र विचार आज भी युवाओं में ऊर्जा और जोश भरने का काम कर सकते हैं, बशर्ते हम उन्हें सही ढंग से आत्मसात करें और देशहित को सर्वोपरि रखें।

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