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राजभवन में ‘सेवा सरिता’ का विमोचन: राज्यपाल ने किया 30 साल की समर्पित सेवा को सम्मानित

दुर्ग (पब्लिक फोरम)। तीस साल की अथक सेवा, समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और रचनात्मकता का जो सिलसिला एक साधारण कार्यकर्ता ने शुरू किया था – वह अब एक दस्तावेज बन चुका है। छत्तीसगढ़ के राजभवन में महामहिम राज्यपाल रामेन डेका के करकमलों द्वारा “सेवा सरिता” नामक इस विशेष दस्तावेज का विमोचन किया गया। यह दस्तावेज दुर्ग के ओम सत्यम शिक्षण एवं जन विकास समिति के सचिव एवं जिला चिकित्सालय की जीवन दीप समिति के आजीवन सदस्य दिलीप ठाकुर के तीन दशकों की सेवा, सामाजिक और रचनात्मक यात्रा का जीवंत लेखा-जोखा है।

राज्यपाल ने की सराहना, राजभवन लाइब्रेरी में मिली जगह
विमोचन के अवसर पर राज्यपाल रामेन डेका ने “सेवा सरिता” का गहन अवलोकन किया। इसमें संकलित सामाजिक कार्यों और सेवा गतिविधियों की उन्होंने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राज्यपाल महोदय ने दिलीप ठाकुर के साथ विभिन्न सामाजिक विषयों पर सार्थक संवाद भी किया।

इस अवसर की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि राज्यपाल ने “सेवा सरिता” को राजभवन की लाइब्रेरी में संरक्षित रखने के निर्देश दिए – यह एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता के लिए अत्यंत गौरव की बात है जिसने अपना जीवन बिना किसी प्रचार-प्रसार के समाजसेवा को समर्पित किया।
कार्यक्रम में ओम सत्यम शिक्षण एवं जन विकास समिति के अध्यक्ष “सीताराम ठाकुर” भी उपस्थित रहे।

कौन हैं दिलीप ठाकुर?
दिलीप ठाकुर उन लोगों में से हैं जो शोर-शराबे से दूर, चुपचाप समाज की सेवा में जुटे रहते हैं। वे एक साथ कई भूमिकाओं में सक्रिय रहे हैं –
– ओम सत्यम शिक्षण एवं जन विकास समिति के सचिव के रूप में शिक्षा और जन-जागरण का काम
– जीवन दीप समिति, जिला चिकित्सालय दुर्ग के आजीवन सदस्य के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग
– तीन दशकों से निरंतर सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी
“सेवा सरिता” इन्हीं वर्षों की थकान, लगन और संतोष की कहानी है – शब्दों में पिरोई गई एक नदी की तरह, जो बिना रुके बहती रही।

बधाइयों का आया तांता
इस उपलब्धि पर दिलीप ठाकुर को समाज के विभिन्न वर्गों से बधाई और शुभकामनाएं मिली हैं, जिनमें शामिल हैं –
– श्री सत्य साईं सेवा समिति
– राजपूत क्षत्रिय महासभा (क्रमांक: 1282)
– जिला चिकित्सालय के चिकित्सक एवं कार्मिक
– सत्यम शिवम सुन्दरम समिति के सदस्य

आज जब समाजसेवा अक्सर प्रचार और पुरस्कार की आकांक्षा से जुड़ जाती है, दिलीप ठाकुर जैसे लोग याद दिलाते हैं कि असली सेवा वह है जो बिना अपेक्षा के की जाए। “सेवा सरिता” का राजभवन की लाइब्रेरी में स्थान पाना सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है – यह उन तमाम गुमनाम कार्यकर्ताओं को भी मान्यता है जो रोज़ समाज की जड़ों को सींचते हैं, बिना किसी स्वार्थ के।

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