कोरबा (पब्लिक फोरम)| भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र राय की जयंती के उपलक्ष्य में सरस्वती शिशु मंदिर दर्री में आयोजित नौ दिवसीय विज्ञान मेले का रविवार को अत्यंत उत्साहजनक माहौल में भव्य समापन हो गया। पच्चीस जुलाई से शुरू हुए इस अनूठे आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, उनमें नवाचार और अनुसंधान की भावना जगाना तथा विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा को नई दिशा देना था। इस शानदार आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में ज्ञान और विज्ञान का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां बच्चों ने अपनी छिपी हुई प्रतिभा का खुलकर प्रदर्शन किया।

विज्ञान मेले के तहत विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र प्रस्तुति और तात्कालिक भाषण जैसी बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पत्र प्रस्तुति प्रतियोगिता के तरुण वर्ग में खुशी श्रीवास ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि किशोर वर्ग में दिव्या जाल अव्वल रहीं। इसके अलावा तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में खुशी श्रीवास और डिम्पल साहू ने अपनी ओजस्वी और प्रभावशाली प्रस्तुतियों से सबका दिल जीतते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। इन प्रतियोगिताओं में बच्चों ने विज्ञान के तमाम जटिल विषयों पर जिस आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखे, उसने सभी को अचंभित कर दिया।
ज्ञान की इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए प्रश्न मंच और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थियों ने अपनी बौद्धिक क्षमता का शानदार परिचय दिया। प्रश्न मंच के तरुण वर्ग में मनीषा, सत्यवती, प्राची, नेहा, दिव्या और आँचल साहू की टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन कर पहला स्थान पाया। बाल वर्ग में चंद्रवती, वासनी और काव्या की टीम ने बाजी मारी, वहीं शिशु वर्ग में दक्ष, भविष्य और आदित्य ने अपनी मेधा का परचम लहराया। दूसरी ओर, प्राथमिक विभाग की विज्ञान प्रयोग प्रतियोगिता में कावेरी, सत्या, स्वाति, आदित्य और साक्षी ने अपने हाथों से अनोखे प्रयोग करके विज्ञान के सिद्धांतों को इतने सरल तरीके से प्रस्तुत किया कि उपस्थित सभी लोगों ने उनकी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

इस पूरे विज्ञान मेले का सबसे बड़ा आकर्षण विज्ञान मॉडल प्रतियोगिता रही, जहां बच्चों की कल्पनाशीलता ने मूर्त रूप लिया। किशोर वर्ग की मॉडल प्रतियोगिता में सृष्टि ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि डिम्पल, प्रेक्षा, दुनिक्ष, नियति और रागिनी के सामूहिक प्रयास ने द्वितीय स्थान अपने नाम किया। बाल वर्ग में धनराज, अखिल और प्रियांशु ने प्रथम स्थान हासिल किया, कुणाल दूसरे स्थान पर रहे और खिलेश, डीकेश तथा ज्ञानेश्वर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं सबसे छोटे शिशु वर्ग में आदित्य और मयंक की जोड़ी ने पहला स्थान हासिल किया, स्वाति और चित्रांगनी दूसरे तथा जिज्ञांश तीसरे स्थान पर रहे। बच्चों द्वारा बनाए गए इन तमाम वर्किंग और नॉन-वर्किंग मॉडलों ने यह साबित कर दिया कि आने वाले कल के वैज्ञानिक इन्हीं कक्षाओं से तैयार हो रहे हैं।
नौ दिनों तक चले इस ज्ञान उत्सव के समापन समारोह को यादगार बनाने के लिए कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। हसदेव शिक्षण समिति के व्यवस्थापक भीष्म देव सिंह, कोषाध्यक्ष मेहुल फड़तड़े, पूर्व अध्यक्ष बद्रीप्रसाद स्वर्णकार और विद्यालय के होनहार भूतपूर्व छात्र राजू सोनी ने विशेष रूप से शिरकत की। अतिथियों ने बच्चों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का बारीकी से अवलोकन किया और उनकी मेहनत व रचनात्मकता की भरपूर सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। अतिथियों के इन प्रेरणादायक शब्दों ने न सिर्फ विजेताओं बल्कि भाग लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का उत्साह दोगुना कर दिया।
यह विज्ञान मेला सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच और तार्किक क्षमता को विकसित करने का एक सफल मंच साबित हुआ। इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे देश के भविष्य को संवारने में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार होते हैं। इस विज्ञान मेले ने दर्री क्षेत्र के शैक्षणिक माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
हम इस आयोजन और विज्ञान शिक्षा के महत्व पर आपके विचारों का भी स्वागत करते हैं। आपको यह आयोजन कैसा लगा और बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए विद्यालयों को और क्या कदम उठाने चाहिए, इस बारे में अपने बहुमूल्य विचार हमें 750publicforum@gmail.com पर जरूर भेजें। आपके विचार हमारे आगामी अंकों में शामिल किए जाएंगे।





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