दिल्ली के मुंडका क्षेत्र में 26 जून को एक सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन सफाईकर्मियों- अरुण, संदीप और चांद- की मौत हो गई। घटना के बाद श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव श्रम के इस्तेमाल तथा श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुंडका हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा और जवाबदेही के प्रश्न
26 जून को दिल्ली के मुंडका स्थित एक सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन सफाईकर्मी जहरीली गैस की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान अरुण, संदीप और चांद के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वे टैंक के भीतर सफाई कार्य कर रहे थे।

घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और श्रमिक अधिकार समूहों ने आरोप लगाया कि सफाईकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
कानून क्या कहता है?
भारत में ‘मैला ढोने का प्रतिषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013’ तथा अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मानव श्रम के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। कानून का उद्देश्य ऐसी सफाई व्यवस्था को यांत्रिक बनाना और सफाईकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसके बावजूद समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न उठते हैं।

सामाजिक संगठनों ने उठाई कार्रवाई की मांग
घटना के बाद सामाजिक संगठनों और श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने दोषी ठेकेदारों तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को केवल “दुर्घटना” मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं।
संगठनों ने मृतक सफाईकर्मियों के परिवारों को उचित मुआवजा, न्याय और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
लगातार सामने आ रही हैं ऐसी घटनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में आधुनिक मशीनों के उपयोग, ठेका प्रणाली की निगरानी तथा सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन के बिना ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। यह केवल श्रम सुरक्षा का नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्रशासन और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का भी प्रश्न है।
मुंडका की घटना केवल तीन परिवारों की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा, श्रम अधिकारों और कानून के पालन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। जांच के निष्कर्ष जो भी हों, यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि जब तक सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन, जवाबदेही तय और मानवीय गरिमा की रक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसी मौतें समाज और व्यवस्था दोनों के सामने कठिन प्रश्न खड़े करती रहेंगी।





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