नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। बांग्लादेश में आरक्षण कोटा में बदलाव के खिलाफ हो रहे आंदोलन को शेख हसीना सरकार द्वारा दमन करने की कोशिशें अब विफल हो चुकी हैं। छात्रों का यह आंदोलन अब जनता के व्यापक समर्थन में बदल गया है, जो शेख हसीना के इस्तीफे और उनके निरंकुश शासन के अंत की मांग कर रहा है। हसीना का इस्तीफा और देश से पलायन यह स्पष्ट करता है कि जनता का गुस्सा जायज था। इस ऐतिहासिक विजय के क्षण में, हम बांग्लादेश की लोकतंत्र-प्रेमी जनता को हार्दिक बधाई देते हैं।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की केंद्रीय कमेटी ने अपने बयान में कहा है कि बांग्लादेश इस समय संक्रमण के उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है। वहां से आवामी लीग के नेताओं और उनके कार्यालयों पर हमलों, शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्ति पर तोड़फोड़ और लूटपाट व आगजनी की चिंताजनक खबरें आ रही हैं। लेकिन, इसके साथ ही आंदोलनकारी शक्तियों द्वारा परिस्थिति को संभालने और अल्पसंख्यक समुदाय व आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे जरूरी कदमों की भी सकारात्मक रिपोर्टें मिल रही हैं। रिपोर्टों से यह भी पता चल रहा है कि वहां एक अंतरिम सरकार बनने की संभावना है और नोबेल पुरस्कार विजेता और वरिष्ठ अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस नई सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में हो सकते हैं।
भारत की लोकतांत्रिक शक्तियों को उम्मीद है कि बांग्लादेश अपने मुक्ति युद्ध के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा और अस्थिरता व अराजकता को अधिक समय तक नहीं रहने देगा। मिलिटरी शासन, कट्टरवादियों और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप से बचते हुए, जो आम तौर पर बदलाव और लोकतंत्र के लिए संघर्षरत जनता की आकांक्षाओं को हड़प लेते हैं, बांग्लादेश को आगे बढ़ना चाहिए। भारत सरकार को भी मैत्री और सहयोग की भावना के साथ बांग्लादेश की जनता की संप्रभु पसंद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बांग्लादेश के घटनाक्रम पर भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में, भारत में सामाजिक और राजनीतिक माहौल बिगाड़ने के मकसद से, भ्रामक दुष्प्रचार चल रहा है। हमें इस प्रोपेगैंडा युद्ध के प्रति भी सचेत बने रहना होगा।