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चेक बाउंस मामलों के त्वरित निपटारे की तैयारी: कोरबा में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिला न्यायालय में पराक्रम्य लिखत अधिनियम (चेक बाउंस) से संबंधित मामलों के शीघ्र और आपसी सहमति से निपटारे के उद्देश्य से 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसके सफल संचालन की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिक से अधिक पात्र मामलों की पहचान कर उनके निराकरण पर विशेष जोर दिया गया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशों के अनुरूप जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा द्वारा 18 जुलाई को चेक बाउंस मामलों के निराकरण के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह विशेष लोक अदालत जिला एवं सत्र न्यायालय, कोरबा के कॉन्फ्रेंस कक्ष में आयोजित होगी।

समीक्षा बैठक में तैयारियों की हुई समीक्षा
विशेष लोक अदालत की तैयारियों के तहत 10 जुलाई को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला न्यायालय कोरबा के साथ-साथ व्यवहार न्यायालय कटघोरा, करतला और पाली के न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में चेक बाउंस से संबंधित अधिक से अधिक लंबित एवं समझौते योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें विशेष लोक अदालत में प्रस्तुत करने तथा प्रभावी ढंग से उनका निराकरण सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े बाह्य न्यायालय
बैठक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कु. मयूरा गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती सोनी तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कु. डिम्पल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. कुमुदनी गर्ग, व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) ग्रेसी सिंह तथा तृप्ति राघव उपस्थित रहीं। वहीं कटघोरा, करतला और पाली के बाह्य न्यायालयों के न्यायाधीश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

लोक अदालत का उद्देश्य
पराक्रम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत आने वाले चेक बाउंस मामलों में यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो लोक अदालत के माध्यम से अपेक्षाकृत कम समय में विवाद का समाधान संभव होता है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होने के साथ-साथ संबंधित पक्षों को भी समय और संसाधनों की बचत होती है।

विशेष लोक अदालतें वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि अधिक से अधिक चेक बाउंस मामलों का आपसी सहमति से निपटारा होता है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और संबंधित पक्षों को लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया से राहत मिल सकेगी।

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