आदिवासी विकास परिषद कोरबा में गूंजा सत्य और समानता का संदेश
कोरबा (पब्लिक फोरम)। जब समाज अंधेरे में डूबा था, जब स्त्री को शिक्षा का अधिकार नहीं था, जब जाति की दीवारें इंसान को इंसान से अलग करती थीं – तब एक क्रांतिकारी विचारक ने मशाल थामी और पूरे समाज को नई राह दिखाई। वे थे – महात्मा ज्योतिबा फुले।
उनकी इसी अमर विरासत को सम्मान देने के लिए 11 अप्रैल 2026 को आदिवासी विकास परिषद, जिला कोरबा के तत्वावधान में महात्मा ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
सत्यशोधक की विरासत को किया नमन
कार्यक्रम में परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष रूपेंद्र पैकरा ने महात्मा फुले के जीवन और संघर्ष की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार फुले जी ने महिला शिक्षा, जाति उन्मूलन और सामाजिक समानता को अपने जीवन का ध्येय बनाया और सत्यशोधक समाज की स्थापना कर एक नई वैचारिक क्रांति का सूत्रपात किया।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश प्रधान ने महात्मा फुले के समाज के प्रति अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
जिला अध्यक्ष वीर साय और महासचिव राम मूरत सहित परिषद के अनेक सदस्यों ने इस अवसर पर उपस्थित होकर महात्मा फुले को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी 199वीं जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

विचार जो आज भी जीवित हैं
महात्मा ज्योतिबा फुले केवल एक व्यक्ति नहीं, एक विचारधारा थे। उन्होंने वह काम किया जो उस युग में असंभव समझा जाता था – उन्होंने लड़कियों के लिए पाठशाला खोली, दलितों को सम्मान का हक दिलाया और यह सिद्ध किया कि सच्चा धर्म मनुष्यता की सेवा है।
आदिवासी विकास परिषद का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि फुले जी की ज्योति आज भी समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के मन में जल रही है।





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