कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को बालकोनगर में एल्युमिनियम एम्पलाइज यूनियन (एटक) के बैनर तले सैकड़ों श्रमिकों ने एकजुट होकर श्रमिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। बालको गेट परसाभाटा से शुरू हुई विशाल रैली ने पूरे बालको क्षेत्र का भ्रमण किया और यूनियन कार्यालय पहुंचकर सभा के साथ संपन्न हुई। इस दौरान श्रमिकों ने गगनभेदी नारों के साथ श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण और श्रमिक हितों पर हो रहे कथित हमलों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
रैली में बड़ी संख्या में बालको संयंत्र के विभिन्न विभागों- कॉस्ट हाउस, पावर प्लांट, गेराज, पार्ट्स रूम, कार्बन, यूटिलिटी और ब्रेकर शॉप सहित अन्य इकाइयों के श्रमिक शामिल हुए। पूरे आयोजन में श्रमिक एकता और अधिकारों की रक्षा का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

सभा को संबोधित करते हुए यूनियन अध्यक्ष एवं प्रदेश महासचिव कॉमरेड हरिनाथ सिंह ने श्रमिकों को मजदूर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज श्रमिकों को जो भी अधिकार प्राप्त हैं, वे पूर्वज मजदूरों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार श्रमिक हितों से जुड़े 44 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में बदलकर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि इन श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रमिकों को 12 घंटे तक कार्य करने की बाध्यता हो सकती है, कंपनियों को छंटनी करने में आसानी होगी और रोजगार की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया जा रहा है, सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं और किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी अब तक नहीं दी गई है। ऐसे समय में श्रमिकों और किसानों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।

यूनियन महासचिव ने मजदूर दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन शिकागो के उन श्रमिक शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने 8 घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर संघर्ष किया था। उन्होंने बताया कि उस दौर में मजदूरों से 15 से 16 घंटे तक काम लिया जाता था और उन्हें बेहद कम वेतन दिया जाता था। अमेरिका के शिकागो से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया, जिसके बाद 8 घंटे कार्य, 8 घंटे आराम और 8 घंटे परिवार व व्यक्तिगत जीवन के लिए तय किए गए।
उन्होंने कहा कि देश निर्माण में मजदूरों और किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन आज भी उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड सुनील सिंह ने कहा कि देश के सभी कारखानों में श्रम कानूनों का सख्ती से पालन होना चाहिए। उन्होंने “समान काम के लिए समान वेतन” की मांग दोहराते हुए ठेका कर्मचारियों को नियमित किए जाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार “वन नेशन, वन इलेक्शन” जैसे प्रस्तावों पर विचार कर सकती है, तो “वन नेशन, वन मिनिमम वेतन” पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। पूरे देश में श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम वेतन लागू किया जाना समय की मांग है।
मजदूर दिवस पर आयोजित इस रैली और सभा ने स्पष्ट संकेत दिया कि बालकोनगर के श्रमिक अपने अधिकारों, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर संगठित होकर संघर्ष के लिए तैयार हैं। आयोजन के दौरान श्रमिकों ने एकजुटता, संघर्ष और अधिकार संरक्षण का संकल्प दोहराया।





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