कोरबा (पब्लिक फोरम)| छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में आवारा और घूमंतू मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी और सराहनीय पहल शुरू की है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत के सख्त निर्देश के बाद शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य रात के समय होने वाले हादसों को रोकना और राहगीरों की जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रशासनिक टीम ने शहर के व्यस्ततम इलाकों जैसे निहारिका और घंटाघर क्षेत्र में उतरकर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत पशु चिकित्सा विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को पकड़कर उन्हें चमकदार रेडियम बेल्ट पहना रही है। रेडियम बेल्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अंधेरे में गाड़ियो की रोशनी पड़ते ही मवेशी दूर से ही चमकने लगेंगे। इससे वाहन चालकों को संभलने का मौका मिल जाएगा और रात के वक्त होने वाले जानलेवा हादसों में काफी कमी आएगी।
केवल रेडियम बेल्ट बांधना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि मवेशी पालकों पर भी नकेल कसने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सड़कों पर आवारा घूमते पाए जाने वाले पशुओं के मालिकों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने की सख्त कार्रवाई की जाए। टीम ने क्षेत्र के मवेशी पालकों को आमने-सामने समझाते हुए कहा है कि वे अपने पशुओं को सड़कों पर लावारिस छोड़ने के बजाय किसी सुरक्षित स्थान पर बांधकर रखें।
जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ना आम जनता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। यह लापरवाही किसी की जान ले सकती है, इसलिए ऐसे मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अभियान शहर के हर इलाके में लगातार जारी रहेगा। आने वाले दिनों में नियमित धरपकड़, रेडियम बेल्ट लगाने और लोगों को जागरूक करने का काम बड़े पैमाने पर किया जाएगा।
सड़क सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है। जिला प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे सड़कों को सुरक्षित बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। यदि शहर की किसी भी मुख्य सड़क या चौराहे पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा दिखता है, तो इसकी तुरंत सूचना नगर निगम या संबंधित विभाग को दें। जनता के इस छोटे से सहयोग और सजगता से कई मासूम जानें बचाई जा सकती हैं।





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