16 परिवारों के मुआवजे और रोजगार की मांग
औद्योगिक विकास बनाम जन अधिकार, शांति नगर के विस्थापितों की हुंकार
कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक केंद्र कोरबा में वेदांता अधिग्रहित बालको के 1200 मेगावाट विद्युत संयंत्र के प्रदूषण से त्रस्त शांति नगर के निवासियों ने 1 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम दिया है। शांति नगर संघर्ष समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 30 दिनों के भीतर त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की मांग की है। प्रभावितों का कहना है कि यदि 16 परिवारों के लंबित मुआवजे और 39 स्थानीय युवाओं के रोजगार का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
15 वर्षों का दर्द और कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि
शांति नगर, बालको के निवासी पिछले लगभग 15 वर्षों से बालको संयंत्र के कूलिंग टॉवर ओ8से निकलने वाले भारी वायु और ध्वनि प्रदूषण का दंश झेल रहे हैं। चौबीसों घंटे होने वाले इस शोर और हवा में तैरती राख ने स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अपनी इस बदहाली के खिलाफ निवासियों ने एक लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी है।
यह मामला माननीय बिलासपुर उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां अदालत ने जनहित याचिका (WPPIL क्रमांक 27/2013) के तहत प्रभावितों के पक्ष में आदेश पारित किए थे। न्यायालय के रुख के बाद प्रशासन और प्रबंधन पर दबाव बना, जिसके परिणामस्वरूप 17 मार्च 2023 को जिला प्रशासन की मौजूदगी में एक त्रिपक्षीय सहमति पत्र निष्पादित हुआ। इस समझौते में स्थानीय लोगों को रोजगार, उचित पुनर्वास और मुआवजा देने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था।
वादे अनेक, धरातल पर कार्रवाई शून्य
सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होने के तीन साल बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासनिक उदासीनता और कॉर्पोरेट जवाबदेही की कमी का आलम यह है कि आज तक 16 पात्र परिवारों को स्वीकृत मुआवजा राशि का पूर्ण भुगतान नहीं मिल सका है। इसके अलावा, स्थानीय प्रभावित युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
वर्ष 2024 से 39 स्थानीय योग्य युवाओं के बायोडाटा प्रशासनिक फाइलों में दबे पड़े हैं। स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर वर्ष 2025 में मार्च और अप्रैल के महीनों (10 मार्च, 26 मार्च और 17 अप्रैल 2025) में अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में तीन दौर की बैठकें भी हुईं। इसके बाद 30 अप्रैल 2025 को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा गया, लेकिन प्रबंधन और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
“हम पिछले 15 वर्षों से अपने ही घरों में घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं। प्रदूषण ने हमारे बच्चों की सेहत छीन ली और प्रबंधन ने हमारा हक। प्रशासन की मौजूदगी में जो समझौते हुए थे, वे सिर्फ कागजी साबित हुए। अब हमारे पास अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
— सौरभ अग्रवाल एवं पी. योगेश कुमार (प्रतिनिधि, शांति नगर संघर्ष समिति)
शांति नगर संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें
आंदोलन की राह पर बढ़ने से पहले शांति नगर संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन और बालको प्रबंधन के सामने निम्नलिखित पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं:
🔹 त्रिपक्षीय बैठक का आयोजन: आगामी 30 दिनों के भीतर जिला प्रशासन, बालको प्रबंधन और संघर्ष समिति के बीच एक निर्णायक बैठक बुलाई जाए।
🔹 समयबद्ध कार्ययोजना: 17 मार्च 2023 के सहमति पत्र के शत-प्रतिशत पालन के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय हो।
🔹 मुआवजे का पूर्ण भुगतान: चिन्हित 16 पात्र परिवारों को उनकी स्वीकृत मुआवजा राशि का तुरंत भुगतान किया जाए।
🔹 युवाओं को रोजगार: फाइलों में लंबित 39 स्थानीय युवाओं के बायोडाटा पर तुरंत निर्णय लेकर योग्य उम्मीदवारों को रोजगार दिया जाए।
🔹 लंबित मामलों का निपटारा: पुनर्वास और NH-149B (चांपा-कोरबा-छुरी-कटघोरा चरण-II) रजिस्ट्री प्रतिबंध आदेश से जुड़े सभी प्रभावितों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस ज्ञापन की प्रतियां छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव (नवा रायपुर), पुलिस अधीक्षक (कोरबा), नगर पालिक निगम के सभापति नूतन ठाकुर, वार्ड क्रमांक 39 के पार्षद तरुण राठौर, और भाजपा के जिला नेतृत्व (गोपाल मोदी एवं प्रीति स्वर्णकार) को भी भेजी गई हैं ताकि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस जन-समस्या पर दबाव बनाया जा सके।
औद्योगिक विकास की बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच शांति नगर के इन परिवारों की लड़ाई केवल मुआवजे या नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा के साथ जीने के मानवीय अधिकार की है। यदि प्रशासन ने इस 30 दिनों की अवधि में सुध नहीं ली, तो कोरबा की धरती पर एक बार फिर औद्योगिक अशांति का दौर शुरू हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और बालको प्रबंधन की होगी।





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