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बालकोनगर में गौरी शंकर गुरुकुल के नए भवन का भूमिपूजन

बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। सेक्टर-3 स्थित गौरी शंकर गुरुकुल में नए भवन निर्माण के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भवन की आधारशिला रखी गई। कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद हित्तानंद अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बड़ी संख्या में वार्डवासी और स्थानीय नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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वैदिक विधि-विधान से हुआ भूमिपूजन
गौरी शंकर गुरुकुल परिसर में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। मुख्य पुरोहित पंडित अविनाश जोशी ने पूजा-अर्चना और वैदिक विधि-विधान संपन्न कराया। उनके मार्गदर्शन में नए भवन की आधारशिला रखी गई तथा लोक कल्याण की कामना की गई।

कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद हित्तानंद अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके अलावा वार्ड के नागरिक, स्थानीय प्रबुद्धजन और गुरुकुल से जुड़े लोग बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए।

शिक्षा और संस्कार के लिए बेहतर वातावरण की उम्मीद
इस अवसर पर पार्षद हित्तानंद अग्रवाल ने गुरुकुल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नए भवन के निर्माण से बच्चों को शिक्षा और संस्कारों के संवर्धन के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।
उन्होंने वार्ड के विकास तथा सामाजिक कार्यों में हर संभव सहयोग देने की बात भी कही। कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने गुरुकुल प्रबंधन को नए भवन निर्माण के लिए बधाई दी।

निर्माण कार्य पूरा होने की कामना
भूमिपूजन के बाद उपस्थित लोगों ने भवन निर्माण कार्य के सफल और निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक शुभकामनाओं के साथ हुआ।

शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
गौरी शंकर गुरुकुल में प्रस्तावित भवन का निर्माण केवल भौतिक सुविधा बढ़ाने की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए शिक्षा और संस्कार का बेहतर वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, भवन की निर्माण लागत, निर्माण की समयसीमा और प्रस्तावित सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी कार्यक्रम में उपलब्ध नहीं कराई गई।

किसी भी शिक्षण संस्थान का भवन केवल ईंट और सीमेंट की संरचना नहीं होता, बल्कि वह बच्चों के सीखने और उनके भविष्य को आकार देने का माध्यम भी बनता है। गौरी शंकर गुरुकुल के नए भवन से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने की उम्मीद है। अब इसकी सार्थकता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा के साथ पूरा होकर बच्चों के लिए उपयोगी साबित हो।

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