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दीपका वार्ड 15 उपचुनाव: नामांकन अस्वीकृति के विरुद्ध हाईकोर्ट पहुंचीं शोभा तिग्गा

कोरबा के दीपका वार्ड 15 उपचुनाव में शोभा तिग्गा का नामांकन NOC की शर्त पर अस्वीकार, मामला हाईकोर्ट बिलासपुर पहुंचा। नगर पालिका अधिकारियों पर मनमानी का आरोप।

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले की नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 15 में हो रहे उपचुनाव ने एक कानूनी मोड़ ले लिया है। वार्ड की निवासी शोभा तिग्गा का नामांकन पत्र एक विवादित आदेश के तहत यह कहकर अस्वीकार कर दिया गया कि वे नगर पालिका की एक पूर्व दुकान के संबंध में NOC प्रस्तुत नहीं कर सकीं – जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार वर्ष 2021 में ही सभी बकाया चुकाए जा चुके थे। इस पर शोभा तिग्गा ने बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और प्रतिवादी अधिकारियों पर मनमाने ढंग से चुनावी प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाया है।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार दीपका वार्ड 15 में 1 जून 2026 को मतदान और 4 जून 2026 को मतगणना निर्धारित है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 मई 2026 थी। इसी प्रक्रिया के दौरान शोभा तिग्गा का नामांकन पत्र अस्वीकार किए जाने की घटना हुई, जो अब न्यायिक विवाद का विषय बन चुकी है।

नामांकन अस्वीकृति का घटनाक्रम
शोभा तिग्गा ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया है कि उन्होंने वर्ष 2021 में नगर पालिका दीपका की चौपाटी में दुकान क्रमांक 06 के लिए एग्रीमेंट किया था और उसी वर्ष उक्त दुकान से संबंधित सभी बकाया राशि चुका दी थी। 18 मई 2026 को जब वे अपना नामांकन पत्र जमा करने कार्यालय पहुंचीं, तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने उन्हें उसी दुकान के संबंध में NOC अथवा पंचनामा प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए एक पत्र जारी किया।

शोभा तिग्गा ने उसी दिन संबंधित कार्यालय से NOC जारी करने की लिखित मांग की। उनका तर्क है कि जो अधिकारी NOC मांग रहे थे, वही अधिकारी उसे जारी करने के लिए भी अधिकृत थे — ऐसे में यह शर्त व्यावहारिक रूप से पूरी करना असंभव था।

कानूनी आधार पर आपत्ति
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से दायर याचिका में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ म्युनिसिपैलिटीज अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत शोभा तिग्गा किसी भी अयोग्यता की श्रेणी में नहीं आतीं – क्योंकि उनके विरुद्ध कोई वर्तमान बकाया नहीं है और न ही कभी कोई नोटिस, मांग या वसूली की कार्रवाई की गई। याचिका में तर्क दिया गया है कि नामांकन स्वीकार करने के लिए इस प्रकार की अतिरिक्त शर्त थोपना कानून की भावना के विरुद्ध है।

प्रतिवादी पक्ष
याचिका में छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त/सचिव, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका और वार्ड 15 के रिटर्निंग ऑफिसर को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में क्या मांगा गया
शोभा तिग्गा ने न्यायालय से 18 मई 2026 के विवादित पत्र को रद्द करने और यह निर्देश देने की मांग की है कि प्रतिवादी उनका नामांकन पत्र बिना किसी गैर-कानूनी दस्तावेज की शर्त के स्वीकार करें और आगे की प्रक्रिया पूर्ण करें।

दीपका वार्ड 15 का यह प्रकरण केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का मामला नहीं है – यह उस व्यापक सवाल से जुड़ा है कि क्या स्थानीय निकाय चुनावों में प्रशासनिक शक्ति का उपयोग किसी नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करने के लिए किया जा सकता है। उच्च न्यायालय का निर्णय न केवल शोभा तिग्गा की किस्मत तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि चुनावी प्रक्रिया में अधिकारियों की विवेकाधीन शक्ति की वैध सीमाएं कहाँ तक हैं।

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