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कोरबा: लगातार अपराधिक गतिविधियों के आरोप में सोमनाथ अग्रवाल जिला बदर

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने आदतन अपराधी बताए गए सोमनाथ अग्रवाल उर्फ सोमू अग्रवाल के विरुद्ध एक वर्ष के लिए जिला बदर की कार्रवाई की है। जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर कुणाल दुदावत ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत यह आदेश जारी किया है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा था तथा लोक शांति प्रभावित होने की आशंका थी।

कोरबा जिले में आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने आदतन अपराधी बताए गए सोमनाथ अग्रवाल उर्फ सोमू अग्रवाल के विरुद्ध जिला बदर की कार्रवाई की है। जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा जारी आदेश के अनुसार सोमनाथ अग्रवाल को एक वर्ष की अवधि तक कोरबा सहित नौ जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर रहना होगा।

24 घंटे के भीतर जिला छोड़ने का निर्देश
जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार संबंधित व्यक्ति को आदेश प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर प्रतिबंधित जिलों की सीमा से बाहर जाना होगा। प्रतिबंध की अवधि के दौरान वह सक्षम प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना कोरबा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर तथा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलों की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा।

गंभीर आपराधिक मामलों का उल्लेख
जिला दण्डाधिकारी द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि सोमनाथ अग्रवाल के विरुद्ध समय-समय पर विभिन्न गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें मारपीट, बलवा, गाली-गलौज, धमकी, अवैध वसूली, शासकीय कार्य में बाधा तथा लोक शांति भंग करने जैसे मामलों का उल्लेख किया गया है।

प्रशासन के अनुसार पुलिस अभिलेखों में उसके विरुद्ध लगातार आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें दर्ज रही हैं। आदेश में यह भी कहा गया है कि पूर्व में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई किए जाने के बावजूद उसके व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आया।

प्रशासन ने बताया कार्रवाई का आधार
आदेश में उल्लेख है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों के कारण क्षेत्र के नागरिकों और व्यापारियों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न हो गया था। प्रशासन के अनुसार कई मामलों में प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित उसके प्रभाव अथवा भय के कारण खुलकर शिकायत दर्ज कराने या गवाही देने से भी कतराते रहे।

पुलिस द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद जिला प्रशासन ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि संबंधित व्यक्ति को जिले में रहने दिया जाता है तो लोक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना बनी रहेगी। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 3 एवं 5 के तहत जिला बदर का आदेश जारी किया गया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिला बदर आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। यदि संबंधित व्यक्ति प्रतिबंधित अवधि के दौरान बिना अनुमति किसी भी प्रतिबंधित जिले में प्रवेश करता है या आदेश की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि जिला बदर की अवधि के दौरान संबंधित व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्रों में दिखाई देता है या उसकी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा जिला प्रशासन को दें, ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई समय पर की जा सके।

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