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महतारी वंदन योजना: ई-केवाईसी की डेडलाइन 30 जून तक बढ़ी, पर CSC संचालकों में उपकरण वितरण को लेकर भ्रम कायम

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी “महतारी वंदन योजना” के तहत ई-केवाईसी की अंतिम तिथि अब “30 जून 2025” तक बढ़ा दी गई है। इस निर्णय से प्रदेश की लाखों हितग्राही महिलाओं को राहत मिली है, जो अब बिना जल्दबाजी के अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकेंगी। हितग्राही महिलाएं अपने नजदीकी “सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर)” पर पहुंच रही हैं और केंद्र संचालक 9 रुपए प्रति केवाईसी की दर से यह कार्य कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा विवाद उभरा है जो पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

समय सीमा बढ़ी, माताओं ने ली राहत की सांस
योजना की ई-केवाईसी प्रक्रिया को लेकर पहले हितग्राहियों में समय की कमी की चिंता थी। अब 30 जून तक की मोहलत मिलने से ग्रामीण और दूरदराज की महिलाओं को भी पर्याप्त वक्त मिलेगा। सीएससी केंद्रों पर भीड़ तो है, पर अब वह भगदड़ नहीं जो पहले थी। संचालक भी एक-एक हितग्राही को धैर्य से सेवा दे पा रहे हैं।

शासन ने दिए निशुल्क उपकरण – पर किसको?
इस बीच एक जानकारी चर्चा में है। लोगों का कहना है कि “शासन द्वारा सभी सीएससी केंद्रों को निशुल्क लैपटॉप, बायोमेट्रिक डिवाइस, अन्य आवश्यक उपकरण और डेटा रिचार्ज उपलब्ध कराया गया है।” आम नागरिकों ने इस कदम की सराहना की और कहा कि यह एक सकारात्मक पहल है।

संचालकों में भ्रम – “हमें तो कुछ नहीं मिला!”

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकांश सीएससी केंद्र संचालक आपस में यह पूछते नजर आ रहे हैं :-
“भाई, तुम्हें लैपटॉप मिला? बायोमेट्रिक डिवाइस मिली? हमें तो कुछ नहीं मिला!”

यह महज गपशप नहीं है। “इन संचालकों ने अपनी जेब से लाखों रुपए खर्च करके लैपटॉप, बायोमेट्रिक डिवाइस और अन्य उपकरण खरीदे हैं।” ऐसे में जब यह खबर आती है कि उपकरण मुफ्त दिए गए, तो स्वाभाविक रूप से उनके मन में असंतोष, आक्रोश और भ्रम की लहर उठती है।

पारदर्शिता की मांग – सूची सार्वजनिक हो

यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जो संचालक दिन-रात मेहनत करके, सभी परेशानियां झेलते हुए महिलाओं की ई-केवाईसी करवा रहे हैं – उन्हें यह भी नहीं पता कि सरकारी सहायता किसे मिली और किसे नहीं।
“जन अपेक्षा यह है कि शासन-प्रशासन स्पष्ट रूप से वह सूची सार्वजनिक करे जिसमें यह दर्ज हो कि किन-किन सीएससी केंद्रों को लैपटॉप, बायोमेट्रिक डिवाइस और अन्य उपकरण प्रदान किए गए हैं।” इससे :-
– निष्पक्षता बनी रहेगी
– भ्रम की स्थिति समाप्त होगी
– जिन संचालकों को उपकरण नहीं मिले, उनके साथ “न्याय” हो सकेगा
– और योजना की “विश्वसनीयता” और मजबूत होगी

और अंत में…
महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समय सीमा का विस्तार एक स्वागत योग्य निर्णय है। लेकिन जब तक उपकरण वितरण में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक वे CSC संचालक – जो इस योजना की रीढ़ हैं – उपेक्षित और असंतुष्ट रहेंगे। “शासन को चाहिए कि वह इन सेवादारों के साथ भी उतना ही न्याय करे, जितना वह हितग्राहियों के लिए करता है।”

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