नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य कामरेड प्रेम सिंह गहलावत का 3 जुलाई 2026 को राजस्थान के झुंझुनू में आकस्मिक निधन हो गया। किसान महासभा की बैठक में शामिल होने के तुरंत बाद उनका निधन हुआ, जिससे वामपंथी आंदोलन और किसान संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी और जनसंगठनों से जुड़े साथियों ने उनके योगदान को याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की है।
कॉमरेड प्रेम सिंह गहलावत का निधन 3 जुलाई 2026 को झुंझुनू, राजस्थान में हुआ। वे उस दिन किसान महासभा की एक बैठक में शामिल हुए थे और बैठक समाप्त होने के बाद उनका निधन हो गया। वे भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य थे।
साथियों के अनुसार कामरेड प्रेम सिंह का स्वभाव सहज और सरल था। वे संगठन के भीतर किसी भी साथी की मदद के लिए सदा तत्पर रहते थे। दिल्ली में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के स्थापना सम्मेलन से लेकर अब तक हुए विभिन्न आयोजनों को सफल बनाने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। संगठनात्मक कार्यों में आने वाली जटिलताओं को सुलझाने का सहज रास्ता निकालने में उन्हें महारत हासिल थी।
ऐपवा की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया कि उनका इस तरह अचानक साथ छोड़ जाना संगठन के लिए गहरा आघात है। संगठन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है।
कॉमरेड प्रेम सिंह गहलावत जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं का निधन जनसंगठनों और वामपंथी आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है, विशेषकर उस दौर में जब किसान आंदोलन और मेहनतकश तबकों के मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। उनके अनुभव और संगठनात्मक कौशल की कमी आने वाले समय में महसूस की जा सकती है।
कॉमरेड प्रेम सिंह गहलावत का जीवन संगठन और साथियों के प्रति समर्पण की मिसाल रहा। उनका निधन केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं, बल्कि उस सहजता और सेवाभाव की क्षति है जो उन्होंने वर्षों तक आंदोलन को दी।






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