कोरबा (पब्लिक फोरम)। बालकोनगर में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने कॉर्पोरेट जवाबदेही तय करने का बिगुल फूंक दिया है। बालको प्रबंधन द्वारा रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से नाराज स्थानीय लोग आगामी 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे सेक्टर-5 से बालको संयंत्र तक एक विशाल ‘रोजगार अधिकार रैली’ निकालेंगे। यह रैली औद्योगिक क्षेत्र में स्थानीय लोगों के अधिकारों की बहाली का एक बड़ा प्रयास है।
हाल ही में बालकोनगर की ‘उत्सव वाटिका’ में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और महिला समितियों की एक अहम रणनीतिक बैठक हुई। इस बैठक में बालको वेदांता प्रबंधन की स्थानीय लोगों के प्रति कथित उदासीनता और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के लचर क्रियान्वयन पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शांतिपूर्ण संवाद का समय अब खत्म हो रहा है, और प्रबंधन को नींद से जगाने के लिए सड़क पर उतरना आवश्यक है।

यह आक्रोश अचानक नहीं उपजा है। दशकों से कोरबा और बालकोनगर के आम लोग, विशेषकर आदिवासी और मूल निवासी, औद्योगिक प्रदूषण और विस्थापन की भारी कीमत चुका रहे हैं। लेकिन जब कारखानों में रोजगार की बात आती है, तो अक्सर स्थानीय युवाओं को दरकिनार कर दिया जाता है। बैठक में उपस्थित लोगों का दर्द इसी हताशा से निकलकर सामने आया।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया, “हम अपनी जमीन, पानी और पर्यावरण की कीमत इस उद्योग के लिए चुका रहे हैं, लेकिन जब रोजगार और सुविधाओं का वक्त आता है, तो स्थानीय युवाओं को अयोग्य बताकर बाहरी लोगों की भर्ती कर ली जाती है। यह अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

मांगपत्र के मुख्य बिंदु:
3 सितंबर को रैली बालको सेक्टर-5 स्थित श्रमिक नेता स्व.धनसिंह ठाकुर की प्रतिमा स्थल से शुरू होकर बालको संयंत्र के परसाभाटा गेट तक जाएगी। वहां प्रबंधन को एक मांगपत्र सौंपा जाएगा, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख मांगें शामिल हैं:
🔹 स्थानीय रोजगार: संयंत्र में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
🔹 बाहरी भर्ती पर रोक: बिना स्थानीय लोगों को अवसर दिए बाहरी राज्यों से हो रही भर्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगे।
🔹 महिलाओं के लिए अवसर: महिलाओं को रोजगार में विशेष प्राथमिकता और सम्मानजनक काम मिले।
🔹 सशक्त CSR नीतियां: सीएसआर फंड का उपयोग दिखावे के बजाय महिलाओं के उत्थान और स्थानीय विकास की प्रभावी योजनाओं में किया जाए।
🔹 जनसुविधाएं: क्षेत्र में बिजली और पानी जैसी बुनियादी और अति-आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। बालको जन अधिकार समिति के संस्थापक विकास डालमिया, बालको जन अधिकार समिति के अध्यक्ष सुनील सुना, और कोरबा पर्यावरण विकास समिति के सचिव अजय कुमार जैसे प्रमुख चेहरों ने इस आंदोलन को दिशा दी।
इनके अलावा बसंत दिक्सेना, बांदेकर मैडम, ‘हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति’ से कलंद्रि परिहार, ह़ीरा मैत्री, शुभा जी और ‘कोरबा चेतना विकास समिति’ की अध्यक्ष विमला बंदे सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने बैठक में हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में वेदांता प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि इस लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मांगपत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

यह आंदोलन केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है; यह औद्योगीकरण के साये में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे सैकड़ों परिवारों के सम्मान और मानवाधिकार की लड़ाई है। यदि वेदांता प्रबंधन इस जन आक्रोश की अनदेखी करता है, तो क्षेत्र की औद्योगिक शांति भंग हो सकती है। आम नागरिक का यह साफ संदेश है कि विकास की नीतियां स्थानीय लोगों को हाशिए पर धकेल कर कभी सफल नहीं हो सकतीं। अब देखना यह है कि 3 सितंबर की रैली के बाद प्रबंधन इस मानवीय और तार्किक मांग पर क्या रुख अपनाता है।





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