2007 के एमओयू की अनदेखी: बालको से CSR मद के 7.05 करोड़ तुरंत जारी करने की मांग
कलेक्टर के निर्देश के बाद भी वेदांता से नहीं मिली आईटी कोरबा को सीएसआर की राशि
कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक केंद्र कोरबा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आई.टी. कोरबा) ने वेदांता अधिग्रहित भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) से अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR – Corporate Social Responsibility) मद का बकाया 7.05 करोड़ रुपए तुरंत जारी करने की मांग की है। जिला कलेक्टर के कड़े निर्देशों के बाद संस्थान के प्राचार्य ने 22 जुलाई 2026 को बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को आधिकारिक पत्र भेजकर इस लंबित राशि के विमोचन की अपेक्षा की है।
19 साल पुरानी प्रतिबद्धता और एमओयू का संदर्भ
यह मामला राज्य में तकनीकी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण से जुड़ा हुआ है। 15 फरवरी 2006 को छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक तथा 20 मार्च 2007 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निष्पादित एम.ओ.यू. (MoU – Memorandum of Understanding / समझौता ज्ञापन) के तहत बालको को इस संस्थान के लिए अनुदान देना तय हुआ था। हालांकि, दो दशकों का समय बीतने को है, लेकिन 7.05 करोड़ रुपए की यह बड़ी धनराशि अब भी बालको प्रबंधन के पास लंबित पड़ी हुई है।
प्रशासनिक सख्ती और नया पत्र
मामले में तेजी तब आई जब कोरबा के जिला कलेक्टर ने शासकीय पत्र क्रमांक 193 (दिनांक 08 जून 2026) के माध्यम से बालको को सीएसआर मद की यह राशि शीघ्र जारी करने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसके अनुपालन में आई.टी. कोरबा के प्राचार्य ने पत्र क्रमांक आई.टी.के./रजि./2026/225 के जरिए बालको प्रशासन को स्मरण पत्र भेजा है।
संस्थान प्रशासन ने अपने पत्र में सीधे तौर पर बालको प्रबंधन को संबोधित करते हुए कहा है:
“कलेक्टर महोदय जिला-कोरबा द्वारा संस्था आई.टी. कोरबा को सी.एस.आर. मद अंतर्गत पूर्व लंबित राशि रू. 7.05 करोड़ के शीघ्र विमोचन हेतु निर्देशित किया गया है। उक्त अनुसार वित्तीय अनुदान की राशि के विमोचन के संबंध में सकारात्मक कार्यवाही आपकी ओर से प्रतीक्षित/अपेक्षित है।”
उच्च स्तरीय निगरानी
पत्र की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतियां राज्य शासन के शीर्ष मंत्रालयों और विभागीय प्रमुखों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं:
🔹 विशेष सहायक: मंत्री, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़
🔹 सचिव: तकनीकी शिक्षा विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर
🔹 संचालक: तकनीकी शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर
🔹 कलेक्टर: जिला कोरबा
जनसरोकार और स्थानीय युवाओं पर असर
कोरबा एक ऐसा क्षेत्र है जहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां और खनन कार्य होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत बालको जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सामाजिक और नैतिक दायित्व बनता है कि वे स्थानीय समुदाय, विशेषकर ग्रामीण और जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के विकास में सहयोग करें। 7.05 करोड़ रुपए की यह लंबित राशि केवल एक वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह आई.टी. कोरबा में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों की आधुनिक प्रयोगशालाओं, तकनीकी उपकरणों और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत से सीधे जुड़ी हुई है।

यदि बालको प्रबंधन समय पर इस अनुदान राशि का विमोचन करता है, तो इससे न केवल इस सरकारी संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में उच्चस्तरीय तकनीकी शिक्षा का अवसर मिलेगा। अब गेंद बालको प्रशासन के पाले में है कि वह शासन और जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व की जिम्मेदारी को कितनी तत्परता से निभाता है।





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