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जल-जंगल-जमीन से संस्कृति तक गूंजी आदिवासी अस्मिता,बगबुडवा में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

खरसिया(पब्लिक फोरम)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर खरसिया ब्लॉक के बगबुडवा सूती स्थित बड़ा देव ठाना में आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भव्य संगम देखने को मिला। गोंडी धर्म-संस्कृति संरक्षण समिति एवं छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ युवा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन उत्साह के साथ शामिल हुए।

पदाधिकारियों एवं समाजजनों की रही प्रमुख सहभागिता

समारोह की अध्यक्षता घनश्याम सिंह जगत ने की। इस अवसर पर प्रांतीय संयोजक महेत्तर सिंह नेताम तथा जिलाध्यक्ष आनंद सिंह जगत सहित
समाज के अनेक पदाधिकारी एवं समाजजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम में गोंडवाना गोंड महासभा के संरक्षक यशवंत राज सिंह तामपुर (रायगढ़), पेंशनर संरक्षक बसंत सिंह ठाकुर (रायगढ़), उपाध्यक्ष तारकेश्वर दीवान (कछार), हसपुर गुड़ी सचिव मोतीलाल नेताम, पेंशनर एवं सर्किल अध्यक्ष कछार भोला सिंह ठाकुर, बैंसपाली सदस्य बुधेश्वर सिदार, युवा अध्यक्ष तामपुर गुड़ी दिलीप कुमार पोर्ते, सर्किल अध्यक्ष भातपुर रोहित कुमार नैनी, भातपुर सदस्य काला सिदार, हरदीझरिया सदस्य गणेश राम जगत, हरदीझरिया सदस्य खुशीलाल जगत, भातपुर सदस्य मान सिंह सिदार एवं पेंसर सदस्य बोधन सिदार सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

इनकी मौजूदगी ने समारोह को सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और आदिवासी विरासत के संरक्षण का मजबूत मंच प्रदान किया।
बड़ा देव की पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी समाज के आराध्य बड़ा देव की विधिवत पूजा-अर्चना एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों की जीवंत झलक देखने को मिली।
जल-जंगल-जमीन सिर्फ संसाधन नहीं, जीवन की पहचान
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल वेशभूषा और लोक परंपराओं तक सीमित नहीं है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण तथा प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व आदिवासी जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के दौर में शिक्षा और विकास जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ अपनी भाषा, बोली, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को बचाना भी उतना ही आवश्यक है।

युवा शक्ति को दिया संस्कृति बचाने का संदेश

समारोह में युवा पीढ़ी की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। युवाओं से शिक्षा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने तथा नशामुक्ति, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि अपने इतिहास और संस्कृति को समझेगी, तो आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी।
बड़ा देव ठाना बना अस्मिता और एकता का प्रतीक
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन महज एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और सामाजिक एकता की मजबूत आवाज बनकर सामने आया। समाजजनों ने अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने, सामाजिक एकता बनाए रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित समाजजनों ने गोंडी धर्म-संस्कृति, आदिवासी परंपरा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
बगबुडवा सूती के बड़ा देव ठाना में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह ने एक स्पष्ट संदेश दिया—विकास और आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना है, लेकिन अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना है।

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