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जनस्वास्थ्य से खिलवाड़: बालको के अधूरे नाली निर्माण से वार्ड 42 दैहानपारा के कुएं हुए प्रदूषित

दूषित पानी पीने को मजबूर वार्डवासी, महामारी का खतरा

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित बालकोनगर के वार्ड क्रमांक 42, दैहानपारा में वर्ष 2019 से छोड़े गए अधूरे नाली के कारण आज जलभराव की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के प्रबंधन की इस घोर लापरवाही से न केवल लोगों के घरों में गंदा पानी घुस रहा है, बल्कि पीने के पानी के स्रोत भी पूरी तरह दूषित हो चुके हैं। इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पर संज्ञान लेते हुए, नगर पालिक निगम ने कंपनी को तत्काल निर्माण पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप और पृष्ठभूमि
नगर पालिक निगम, कोरबा (बालको जोन) के जोन कमिश्नर द्वारा 3 अगस्त 2026 को बालको के महाप्रबंधक (प्रशासन) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस कुप्रबंधन पर जवाबदेही तय करने का प्रयास किया गया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई स्थानीय निवासी दिलेश कुमार उइके द्वारा 27 जुलाई 2026 को जन शिकायत प्रणाली (PGN) के तहत दर्ज कराई गई शिकायतों (शिकायत क्रमांक 790526008902 और 790526008904) के आधार पर की गई है।
दस्तावेजों के अनुसार, यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्ष 2019 में शिव मंदिर सेक्टर 7 एम.टी.आई. हॉस्टल (MTI Hostel) के पीछे इस नाली का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। लेकिन, विडंबना यह है कि कंपनी ने इसे आधी दूरी तक ही बनाया और शेष नाली को खाली जमीन पर यूं ही अधूरा छोड़ दिया। कॉर्पोरेट जवाबदेही (accountability) के बड़े-बड़े दावों के बीच एक छोटे से नाली का 07 साल तक अधूरा रहना, औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों की उपेक्षा का जीता-जागता प्रमाण है।

जलभराव और जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
वर्तमान स्थिति यह है कि शिव मंदिर सेक्टर 7 की तरफ से आने वाला सारा गंदा पानी और मूसलाधार बारिश का जल इसी आधे खोदे गए हिस्से में आकर जमा हो रहा है। जल निकासी का कोई उचित रास्ता न होने के कारण, यह गंदा पानी अब सीधे लोगों के घरों की तरफ बढ़ रहा है।
प्रभावित निवासियों की पीड़ा और बेबसी को शिकायतकर्ता श्री उईके की बातों से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। निगम के पत्र में इस मानवीय संकट को रेखांकित करते हुए स्पष्ट लिखा गया है, “इस विशाल जलभराव के कारण गंदा पानी जमीन के अंदर रिसकर (Seepage होकर) हमारे कुओं तक पहुँच रहा है।”

औद्योगिक लापरवाही (Industrial Negligence) ने आम जनजीवन को निम्नलिखित रूपों में प्रभावित किया है:
🔹 पीने का पानी जहरीला: जमीन के अंदर रिसाव के कारण कुओं का पानी पूरी तरह से दूषित (Polluted) हो चुका है।
🔹 दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त: स्थानीय लोग पीने और निस्तारी (नहाने-धोने) जैसे बुनियादी कार्यों के लिए इसी दूषित और खतरनाक पानी का उपयोग करने को विवश हैं।
🔹 बीमारियों का निमंत्रण: इस दूषित पानी के उपयोग से स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
🔹 हर साल की त्रासदी: वर्ष 2019 से लेकर अब तक काफी लंबा समय बीत चुका है, और हर वर्ष बारिश के मौसम में दैहानपारा के निवासियों को इसी तरह की गंभीर जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।

यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे एक शक्तिशाली औद्योगिक इकाई वेदांता-बालको की प्रशासनिक सुस्ती एक पूरे मोहल्ले के स्वास्थ्य और सुरक्षा को दांव पर लगा सकती है। नगर निगम ने पब्लिक इंटरेस्ट को सर्वोपरि रखते हुए बालको प्रबंधन को तत्काल इस प्रकरण पर संज्ञान लेने और नाली निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इस पत्र की प्रतिलिपि कोरबा के महापौर और निगमायुक्त को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
अब देखना यह है कि क्या वेदांता प्रबंधन आम नागरिकों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएगा, या एक बार फिर कागजी कार्रवाइयों के बीच वार्ड 42 के दैहानपारा निवासी गंदा पानी पीने को फिर से मजबूर रहेंगे।

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