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बालको में मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एटक का एकदिवसीय धरना: श्रमिकों की लंबित मांगें उठीं

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा के बालको नगर स्थित आज़ाद चौक, परसाभाठा में बुधवार को एल्युमिनियम एम्पलाइज यूनियन (एटक) के नेतृत्व में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन और आमसभा आयोजित की गई। यूनियन ने बालको प्रबंधन पर श्रमिक विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए ठेका और स्थायी कर्मचारियों से जुड़े कई लंबित मुद्दों को उठाया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेकर अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।

एल्युमिनियम एम्पलाइज यूनियन (एटक) के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में स्थायी और ठेका श्रमिकों ने विभिन्न श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज़ उठाई। कार्यक्रम बालको कारखाने के मुख्य द्वार के सामने आज़ाद चौक, परसाभाठा में आयोजित किया गया।

यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के बजाय उत्पादन और कॉरपोरेट लाभ पर अधिक ध्यान दे रहा है, जिससे कर्मचारियों के अधिकार और सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।

ठेका श्रमिकों की स्थिति पर चिंता
सभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य एटक के महासचिव हरि नाथ सिंह ने कहा कि एक समय बालको सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई थी, जहां श्रमिक हितों को प्राथमिकता दी जाती थी। उनका आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में श्रमिक सुविधाओं में लगातार कटौती की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि बालको में कार्यरत हजारों ठेका श्रमिक कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के बावजूद लगभग 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे हैं तथा कई आवश्यक श्रम और सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि यदि श्रमिकों की मांगों की अनदेखी जारी रही तो भविष्य में औद्योगिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

यूनियन ने रखीं प्रमुख मांगें
एटक के महासचिव सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि अधिकांश कार्य ठेका व्यवस्था के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे कम वेतन पर अधिक उत्पादन लेने की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने प्रबंधन से मांग की कि—

🔹ठेका श्रमिकों को प्रोडक्शन इंसेंटिव दिया जाए।
🔹एलटीएस में शामिल कर्मचारियों को श्रेणी (कैटेगरी) प्रदान की जाए।
🔹समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
🔹ठेका कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
🔹लंबित फुल एंड फाइनल भुगतान शीघ्र किया जाए।
🔹बालको टाउनशिप में आवास उपलब्ध कराया जाए।
🔹पदोन्नति से जुड़े मामलों का निराकरण हो।
🔹नॉन-एलटीएस कर्मचारियों को कैंटीन भत्ता दिया जाए।
🔹ठेका श्रमिकों की छंटनी पर रोक लगाई जाए।

सुनील सिंह ने कहा कि यदि मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को कारखाने के भीतर तक विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पुराने ठेका कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों की भर्ती की जा रही है, जबकि वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा रहा।

यूनियन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि पहले ठेकेदार बदलने पर भी श्रमिकों का रोजगार सुरक्षित रहता था, लेकिन अब ठेका कंपनी बनी रहती है और श्रमिकों को बदल दिया जाता है। उनके अनुसार इससे रोजगार की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि नॉन-एलटीएस ठेका कर्मचारियों को नियमित वार्षिक वेतनवृद्धि नहीं मिलती, जबकि अन्य कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता है। कैंटीन भत्ते से वंचित कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान वेतन में परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो एटक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।

धरना-प्रदर्शन के अंत में श्रमिकों ने मजदूर एकता के समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद कार्यक्रम का समापन किया गया।
यह प्रदर्शन औद्योगिक संबंधों, ठेका श्रमिकों की कार्यस्थितियों और रोजगार सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में लाता है। यूनियन ने जिन मांगों और आरोपों को उठाया है, उन पर प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी आवश्यक होगा ताकि पूरे मामले की संतुलित तस्वीर सामने आ सके। यदि दोनों पक्षों के बीच समय रहते संवाद नहीं हुआ तो श्रमिक असंतोष औद्योगिक गतिविधियों और उत्पादन पर भी प्रभाव डाल सकता है।
बालको में आयोजित यह प्रदर्शन केवल वेतन या सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार सुरक्षा, श्रम अधिकार और औद्योगिक संबंधों से जुड़े व्यापक प्रश्न भी सामने रखता है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि श्रमिक संगठनों और प्रबंधन के बीच संवाद कितना प्रभावी रहता है और लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में क्या ठोस पहल की जाती है।

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