कोरबा (पब्लिक फोरम)। वेदांता के बालको प्लांट में 1 जुलाई से नया ठेका लागू होते ही 62 संविदा श्रमिकों को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया है। पीड़ित श्रमिकों ने आज सहायक श्रम आयुक्त को ज्ञापन देकर अपनी बहाली और पिछले ठेकेदारों से पूर्ण एवं अंतिम भुगतान (Full & Final Settlement) कराने की गुहार लगाई है।
ठेका कंपनियों की उलझी कड़ियां और अचानक आई विपत्ति
बालको प्लांट में कार्यरत ये श्रमिक पिछले 4 से 5 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे थे। यह पूरा मामला बहुस्तरीय ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। मूल ठेका एनजीएसएल (NGSL) कंपनी के पास था, जिसने फीडबैक पावर (FEEDBACK POWER) कंपनी को काम सौंपा था। फीडबैक पावर ने आगे यह काम उप-ठेकेदार कंपनी ‘श्री साई सर्विसेज मेंटेनेंस प्राइवेट लिमिटेड’ (SRI SAI SERVICES MAINTENANCE PVT. LTD.) को दिया था, जिसके अधीन ये सभी 62 श्रमिक जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे थे।
वर्तमान में बालको प्लांट में एनजीएसएल कंपनी का ठेका समाप्त हो चुका है। प्रबंधन ने 1 जुलाई 2026 से यह कार्य एक नई कंपनी ‘स्टीग एनर्जी सर्विसेज इंडिया’ (STEAG ENERGY SERVICES INDIA) को सौंप दिया है। इस बदलाव के तुरंत बाद, पुरानी कंपनी ने श्रमिकों को व्हाट्सएप संदेश के जरिए नोटिस थमाकर अचानक काम से बैठा दिया और उनके गेट पास ब्लॉक कर दिए।
टूट गई पुरानी परंपरा, श्रमिक संगठनों में आक्रोश
औद्योगिक नगर कोरबा में यह स्थापित परंपरा रही है कि जब भी किसी बड़े संयंत्र में ठेकेदार बदलते हैं, तो पुरानी वर्कफोर्स (श्रमिक बल) को नई कंपनी में समायोजित कर लिया जाता है। लेकिन इस मामले में नियमों और मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया गया है।
श्रमिकों के प्रतिनिधि परदेशी, निखिल शर्मा और प्रदीप गिंज ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा:
“बालको में इससे पहले भी कई बार ठेकेदार बदले हैं, लेकिन कभी किसी स्थानीय श्रमिक को कार्यमुक्त नहीं किया जाता था और न ही गेट पास बंद होते थे। वर्तमान प्रबंधन और ठेकेदारों ने हमें बिना किसी ठोस कारण के सीधे सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।”
आर्थिक संकट और बच्चों की शिक्षा पर मंडराया खतरा
नौकरी जाने के साथ ही इन श्रमिकों के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है। श्री साई सर्विसेज और फीडबैक पावर जैसी कंपनियों ने अब तक इन मजदूरों का ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ यानी अंतिम बकाया भुगतान भी नहीं किया है।
यह समय छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत का है, जब परिवारों को बच्चों के स्कूल-कॉलेज की फीस और किताबों के लिए पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। पवन, निखिल शर्मा और राजबल्ली यादव जैसे पीड़ित श्रमिकों का कहना है कि अचानक बेरोजगार होने से उनके सामने बच्चों की पढ़ाई छुड़ाने की नौबत आ गई है। इसके अलावा, कई परिवारों में बुजुर्गों के चिकित्सीय खर्च के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। श्रमिकों ने कंपनी के एचआर विभाग से कई बार संपर्क किया, लेकिन वहां से केवल टालमटोल भरा जवाब ही मिला।
श्रमिकों की मुख्य मांगें:
🔹 वर्तमान ठेका कंपनी ‘स्टीग एनर्जी सर्विसेज इंडिया’ में सभी 62 श्रमिकों को पूर्व की भांति तत्काल पुनः नियुक्ति (Rejoining) दी जाए।
🔹 पूर्व ठेका कंपनियों (श्री साई सर्विसेज और फीडबैक पावर) से सभी श्रमिकों का ‘फुल एंड फाइनल’ बकाया भुगतान तुरंत कराया जाए।
🔹 भविष्य में ठेका बदलने पर स्थानीय अनुभवी श्रमिकों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं।
श्रमिकों ने इस मामले की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के श्रम एवं वाणिज्य मंत्री लखनलाल देवांगन, कोरबा कलेक्टर और बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है। विकास की बड़ी-बड़ी कहानियों के बीच, इन 62 परिवारों का चूल्हा बुझना Vedanta जैसे कॉर्पोरेट जवाबदेही पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। यदि स्थानीय प्रशासन और वेदांता प्रबंधन ने इस मानवीय संकट पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो औद्योगिक क्षेत्र में अशांति का माहौल बनना तय है।





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