कोरबा (पब्लिक फोरम)। बालकोनगर के परसाभाटा (आजाद चौक) में आगामी 8 जुलाई को एटक (AITUC) से संबद्ध एल्युमिनियम एम्प्लाईज यूनियन एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन करेगी। यूनियन का कहना है कि बालको प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों और श्रमिकों की लंबित समस्याओं के समाधान न होने के विरोध में यह कदम उठाया जा रहा है। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थायी व ठेका श्रमिकों तथा बेरोजगार युवाओं के शामिल होने की संभावना है।
बैठक में लिया गया धरने का निर्णय
बालको एटक कार्यालय में कामरेड हरिनाथ सिंह की अध्यक्षता में एल्युमिनियम एम्प्लाईज यूनियन के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में श्रमिकों की विभिन्न लंबित समस्याओं पर चर्चा करते हुए एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
यूनियन के अनुसार यह धरना-प्रदर्शन 8 जुलाई 2026 को परसाभाटा स्थित आजाद चौक, बालको में आयोजित किया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित होगा।
बार-बार मांगपत्र के बावजूद समाधान नहीं
यूनियन का आरोप है कि प्रबंधन के समक्ष बार-बार मांगपत्र सौंपे जाने और चर्चा किए जाने के बावजूद श्रमिकों की समस्याओं का संतोषजनक हल नहीं निकाला गया है। इसी कारण श्रमिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, और यूनियन को धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।
यूनियन की प्रमुख मांगें
यूनियन द्वारा जारी विज्ञप्ति में निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखी गई हैं –
• ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
• श्रमिकों से वर्तमान में चार बार पंच करवाया जाता है, जिसे घटाकर दो बार किया जाए।
• ठेका श्रमिकों को न्यूनतम वेतन दिया जाए।
• लंबित देयकों और श्रमिक हितों से जुड़े मामलों का शीघ्र निराकरण हो।
• श्रमिक-विरोधी निर्णयों को वापस लिया जाए।
• श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और नियमित संवाद सुनिश्चित किया जाए।
• अप्रैल 2022 से एलटीएस में शामिल ठेका श्रमिकों को अभिलंब श्रेणी प्रदान की जाए।
• बालको में कार्यरत ठेका कर्मचारियों को भी प्रोडक्शन इंसेंटिव दिया जाए।
• स्थानीय बेरोजगार महिला-पुरुषों को रोजगार दिया जाए।
• ठेका श्रमिकों के वेतन में मौजूद विसंगतियां दूर की जाएं।
• नॉन-एलटीएस कर्मचारियों को कैंटीन अलाउंस दिया जाए।
• ड्यूटी समय में परसाभाटा गेट पर भारी वाहनों की आवाजाही पर आधे घंटे की नो-एंट्री लागू की जाए।
यूनियन की अपील
एल्युमिनियम एम्प्लाईज यूनियन (एटक) के सुनील सिंह ने सभी श्रमिकों से धरना-प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है। यूनियन का कहना है कि श्रमिकों की एकजुटता से ही उनकी मांगों पर प्रबंधन को गंभीरता से विचार करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
यदि प्रबंधन की ओर से धरने से पहले या धरने के दौरान कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है। स्थायी और ठेका श्रमिकों के बीच वेतन विसंगति, नियमितीकरण और रोजगार जैसे मुद्दे लंबे समय से औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष की वजह बनते रहे हैं, और बालको क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है।
ठेका श्रमिकों की नियमितीकरण, वेतन विसंगति और सम्मानजनक व्यवहार जैसी मांगें केवल बालको तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ठेका श्रम व्यवस्था से जुड़ी बड़ी बहस का हिस्सा हैं। आठ जुलाई का यह धरना यह भी दिखाएगा कि श्रमिक संगठनों की मांगों पर प्रबंधन कितनी संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देता है।





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