कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले में चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह विशेष लोक अदालत 18 जुलाई और 21 नवंबर 2026 को आयोजित होगी, जिसमें पक्षकार आपसी सहमति से अपने मामलों का निपटारा कर सकेंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
कोरबा में माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी।
यह विशेष लोक अदालत 18 जुलाई 2026 तथा 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को आयोजित होगी। इसमें परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित चेक बाउंस मामलों का आपसी राजीनामे के आधार पर समाधान किया जाएगा।
##लंबित मामलों की पहचान और प्री-सीटिंग के निर्देश
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिले के सभी न्यायिक अधिकारियों को चेक बाउंस से संबंधित लंबित प्रकरणों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर लोक अदालत से पहले प्री-सीटिंग आयोजित करने के लिए भी कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सके।
##व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर
जिला एवं तालुका स्तर पर आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सभी पैरालीगल वालंटियरों को सार्वजनिक स्थानों, बैंकों तथा उन संस्थानों में जाकर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां से चेक बाउंस के मामले सामान्यतः न्यायालय तक पहुंचते हैं।
##पक्षकारों और बैंकों से अपील
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि जिनके चेक बाउंस के मामले न्यायालय में लंबित हैं, वे विशेष लोक अदालत का लाभ उठाकर आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान करें और सरल, सुलभ तथा शीघ्र न्याय प्राप्त करें।
साथ ही बैंक अधिकारियों से भी आग्रह किया गया है कि चेक बाउंस से संबंधित मामलों को न्यायालय में भेजने से पहले प्री-लिटिगेशन के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा तथा तालुका विधिक सेवा समितियों कटघोरा, पाली और करतला के समक्ष प्रस्तुत करें। इससे न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होने के साथ-साथ पक्षकारों का समय और खर्च भी बचाया जा सकेगा।
लोक अदालतें न्याय व्यवस्था का ऐसा माध्यम हैं, जहां आपसी सहमति के आधार पर विवादों का त्वरित और कम खर्च में समाधान किया जाता है। विशेष रूप से चेक बाउंस जैसे मामलों में समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त होने से दोनों पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है।





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