अलीगंज (पब्लिक फोरम)। लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने कम से कम 14 लोगों की जान ले ली, जिनमें 10 छात्र बताए जा रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे पर भाकपा (माले) ने गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, घायलों का सरकारी खर्चे पर इलाज और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने यह भी आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक कोचिंग सेंटर में अचानक भीषण आग भड़क उठी। यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है। आग इतनी तेज़ी से फैली कि अग्निशमन दल के पहुँचने से पहले ही 14 लोगों की मौत हो चुकी थी। मृतकों में बड़ी संख्या उन युवा छात्रों की है, जो अपने भविष्य के सपने लेकर इस कोचिंग सेंटर में पढ़ने आए थे।
प्रशासनिक सवाल
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि शहर के व्यस्ततम इलाके में आग लगने के बाद भी राहत और बचाव का काम समय पर शुरू नहीं हो सका – यह अपने आप में गंभीर प्रशासनिक विफलता का संकेत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस भवन और संस्थान में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कितनी असरदार थी।
पार्टी की प्रमुख मांगें
भाकपा (माले) ने सरकार के सामने चार स्पष्ट मांगें रखी हैं –
– इस घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच कराई जाए
– घायलों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए
– मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए
– घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
इसके साथ ही पार्टी ने मांग की है कि प्रदेश के सभी कोचिंग संस्थानों, शैक्षणिक परिसरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का तत्काल “फायर सेफ्टी ऑडिट” कराया जाए और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएं।
पीड़ितों के साथ एकजुटता
सुधाकर यादव ने उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने इस हादसे में अपने बच्चों और प्रियजनों को खोया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
अलीगंज का यह अग्निकांड महज एक हादसा नहीं है – यह उस व्यापक लापरवाही का परिणाम है जो शहरों में बेतरतीब ढंग से चल रहे कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर बरती जाती रही है। युवा छात्रों की यह असमय मौत तब तक बेमानी साबित होगी, जब तक सरकार ठोस जवाबदेही तय नहीं करती। सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं – सवाल यह है कि ऐसी त्रासदियाँ बार-बार क्यों दोहराई जाती हैं और जिम्मेदार कब तक बचते रहेंगे।





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