राजनांदगांव (पब्लिक फोरम)। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, खाद के कोटे में कटौती, महंगाई और कथित किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान महासभा-एआईसीसीटीयू ने 22 मई 2026 को मूरा रोड बंगोली में विरोध-प्रदर्शन और धरना आयोजित करने का आह्वान किया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आम जनता, किसान और मजदूर लगातार संकट में घिरते जा रहे हैं।
जारी पर्चे में संगठन ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, ईंधन संकट और कृषि क्षेत्र की समस्याओं ने ग्रामीण जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ चुका है। वहीं किसानों को समय पर खाद, बीज और कीटनाशक नहीं मिलने से खेती की लागत बढ़ती जा रही है।
संगठन ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है। पर्चे में यह भी आरोप लगाया गया कि रोजगार सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों से जुड़े पुराने कानूनों को कमजोर किया गया है। मनरेगा जैसी योजनाओं में कटौती और श्रम संहिताओं को लागू करने को लेकर भी असंतोष जताया गया।
किसान महासभा ने दिल्ली किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे संघर्ष और सैकड़ों किसानों की शहादत के बाद कृषि कानून वापस लिए गए थे, लेकिन किसानों से जुड़े कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। संगठन ने कृषि विपणन नीति, बिजली विधेयक और बीज कानून जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
धरना-प्रदर्शन के माध्यम से संगठन ने कई मांगें सामने रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से-
🔹किसानों के लिए खाद का पर्याप्त कोटा बहाल करना
🔹खाद, बीज और कीटनाशक समय पर उपलब्ध कराना
🔹पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बढ़ी कीमतें वापस लेना
*महंगाई पर नियंत्रण करना
*मनरेगा को मजबूत करना
🔹श्रमिक विरोधी बताए जा रहे श्रम कानूनों को वापस लेना
शामिल हैं।
संगठन ने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। पर्चे में कहा गया है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ा सवाल है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छोटे किसान और खेत मजदूर पहले ही बढ़ती लागत, कम आमदनी और रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में ईंधन और खाद्य सामग्री की महंगाई ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई परिवारों के लिए खेती और घर चलाना लगातार कठिन होता जा रहा है।
22 मई को प्रस्तावित यह प्रदर्शन क्षेत्र में किसानों और मजदूरों की आर्थिक चिंताओं को लेकर एक बड़े जनसंगठन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन मांगों और बढ़ते असंतोष पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।





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